अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास, कप्तानी में अद्वितीय रिकॉर्ड छोड़ा
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई
भारतीय क्रिकेट के शांत और विश्वसनीय बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का निर्णय लिया है, जिससे उनके शानदार करियर का अंत हो गया है। विदाई के इस मौके पर उन्होंने एक ऐसा कप्तानी रिकॉर्ड छोड़ा है, जो भारतीय क्रिकेट के इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाएगा। रहाणे ने टेस्ट कप्तान के रूप में कभी हार का सामना नहीं किया। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने विदेशों में ऐतिहासिक जीतें हासिल कीं और कई यादगार लम्हे भारतीय क्रिकेट को दिए।
कप्तानी में न हारने का रिकॉर्ड
रहाणे ने भारत की कप्तानी करते हुए छह टेस्ट मैच खेले, जिनमें से चार में जीत मिली और दो ड्रॉ रहे। यह विशेष है कि उनके कप्तानी करियर में एक भी हार नहीं हुई। भारतीय टेस्ट क्रिकेट में अब तक 38 खिलाड़ियों ने कप्तानी की है, लेकिन केवल चार कप्तान ऐसे हैं जिन्होंने बिना हार के अपना टेस्ट कप्तानी सफर पूरा किया।
ऑस्ट्रेलिया दौरे पर ऐतिहासिक जीत
साल 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी रहाणे के करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। एडिलेड टेस्ट में 36 रन पर सिमटने के बाद टीम कठिनाई में थी। विराट कोहली की अनुपस्थिति में रहाणे ने कप्तानी संभाली और मेलबर्न टेस्ट में शानदार 112 रन बनाकर भारत को जीत दिलाई। यहीं से पूरी सीरीज का रुख बदल गया।
युवाओं के साथ नया इतिहास
श्रृंखला के दौरान कई प्रमुख खिलाड़ी चोटिल हो गए थे, फिर भी रहाणे ने युवा खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखा। मोहम्मद सिराज, शुभमन गिल, वॉशिंगटन सुंदर, शार्दुल ठाकुर और टी नटराजन जैसे खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। भारत ने गाबा में 328 रन का लक्ष्य हासिल कर ऑस्ट्रेलिया को हराया और 32 साल पुराना अजेय रिकॉर्ड तोड़ दिया।
वनडे में भी शानदार कप्तानी
रहाणे का नेतृत्व केवल टेस्ट क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने भारत की कप्तानी में तीन वनडे मैच खेले और सभी में जीत हासिल की। टी20 अंतरराष्ट्रीय में उन्होंने दो मैचों में कप्तानी की, जिसमें एक जीत और एक हार मिली। तीनों प्रारूपों में कुल 11 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उन्हें केवल एक हार का सामना करना पड़ा।
शांत नेतृत्व की विरासत
अजिंक्य रहाणे को हमेशा उनके संयमित व्यवहार और टीम को एकजुट रखने की शैली के लिए जाना जाता है। उन्होंने कप्तान रहते हुए छह टेस्ट में 359 रन बनाए। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके नाम 8400 से अधिक रन और 15 शतक दर्ज हैं। संन्यास के साथ उन्होंने केवल रिकॉर्ड नहीं छोड़े, बल्कि नेतृत्व, धैर्य और जिम्मेदारी की एक मिसाल कायम की, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।
