अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो में जीता पहला गोल्ड मेडल
भारत की जूडो में ऐतिहासिक सफलता
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने जूडो में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। त्रिपुरा की अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय जूडो को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
अस्मिता की अद्भुत जीत
23 वर्षीय अस्मिता डे ने फाइनल में कनाडा की हेइडी क्वाच को 2-1 से हराकर यह ऐतिहासिक जीत हासिल की। मुकाबले की शुरुआत में वह पीछे थीं और उन्हें एक पेनल्टी भी मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने शानदार वापसी की और मुकाबला 1-1 पर पहुंचा दिया। इसके बाद गोल्डन स्कोर में उन्होंने बेहतरीन थ्रो लगाकर जीत हासिल की। इस जीत के साथ, वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।
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— The Khel India (@TheKhelIndia) July 31, 2026
- Asmita Dey won the first ever Judo Gold Medal for India at Commonwealth Games! pic.twitter.com/XZdIcihDew
अस्मिता का सफर
अस्मिता का जन्म 22 मार्च 2003 को त्रिपुरा के बेलोनिया में हुआ। उनके पिता एक साइकिल रिपेयर की दुकान चलाते हैं। उन्होंने पहले 800 मीटर दौड़ में भाग लिया, लेकिन बाद में जूडो को चुना। त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल में प्रशिक्षण के बाद, उन्हें स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) में अभ्यास का अवसर मिला। 2022 एशियन कैडेट और जूनियर चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। इसके बाद, खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स, एशियन ओपन, जूनियर एशिया कप और अफ्रीकन चैंपियनशिप में लगातार अच्छे प्रदर्शन से उन्होंने अपनी स्थिति मजबूत की।
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अगला लक्ष्य: ओलंपिक मेडल
अस्मिता डे की यह जीत केवल एक स्वर्ण पदक नहीं है, बल्कि भारतीय जूडो के लिए नई उम्मीद भी है। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। क्वार्टर फाइनल में ईवा इविंग को हराने के बाद, सेमीफाइनल में सारा एडलिंगटन को गोल्डन स्कोर में मात दी और फिर फाइनल में इतिहास रच दिया। अस्मिता टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) का हिस्सा हैं और उनका अगला लक्ष्य ओलंपिक में भारत के लिए मेडल जीतना है। कॉमनवेल्थ गेम्स का यह गोल्ड उनके करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर है और इससे देश के युवा खिलाड़ियों को नई प्रेरणा मिलेगी।
