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अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो में जीता पहला गोल्ड मेडल

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अस्मिता डे ने जूडो में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय जूडो को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। त्रिपुरा की इस युवा खिलाड़ी ने फाइनल में कनाडा की हेइडी क्वाच को हराया। अस्मिता का सफर छोटे शहर से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय पहचान तक पहुंचा है। उनकी यह जीत न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय जूडो के लिए नई उम्मीद भी है। जानें उनके अगले लक्ष्य के बारे में।
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भारत की जूडो में ऐतिहासिक सफलता


कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने जूडो में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। त्रिपुरा की अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय जूडो को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।


अस्मिता की अद्भुत जीत

23 वर्षीय अस्मिता डे ने फाइनल में कनाडा की हेइडी क्वाच को 2-1 से हराकर यह ऐतिहासिक जीत हासिल की। मुकाबले की शुरुआत में वह पीछे थीं और उन्हें एक पेनल्टी भी मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने शानदार वापसी की और मुकाबला 1-1 पर पहुंचा दिया। इसके बाद गोल्डन स्कोर में उन्होंने बेहतरीन थ्रो लगाकर जीत हासिल की। इस जीत के साथ, वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।



अस्मिता का सफर

अस्मिता का जन्म 22 मार्च 2003 को त्रिपुरा के बेलोनिया में हुआ। उनके पिता एक साइकिल रिपेयर की दुकान चलाते हैं। उन्होंने पहले 800 मीटर दौड़ में भाग लिया, लेकिन बाद में जूडो को चुना। त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल में प्रशिक्षण के बाद, उन्हें स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) में अभ्यास का अवसर मिला। 2022 एशियन कैडेट और जूनियर चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। इसके बाद, खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स, एशियन ओपन, जूनियर एशिया कप और अफ्रीकन चैंपियनशिप में लगातार अच्छे प्रदर्शन से उन्होंने अपनी स्थिति मजबूत की।



अगला लक्ष्य: ओलंपिक मेडल

अस्मिता डे की यह जीत केवल एक स्वर्ण पदक नहीं है, बल्कि भारतीय जूडो के लिए नई उम्मीद भी है। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। क्वार्टर फाइनल में ईवा इविंग को हराने के बाद, सेमीफाइनल में सारा एडलिंगटन को गोल्डन स्कोर में मात दी और फिर फाइनल में इतिहास रच दिया। अस्मिता टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) का हिस्सा हैं और उनका अगला लक्ष्य ओलंपिक में भारत के लिए मेडल जीतना है। कॉमनवेल्थ गेम्स का यह गोल्ड उनके करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर है और इससे देश के युवा खिलाड़ियों को नई प्रेरणा मिलेगी।