अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो में भारत को दिलाया पहला गोल्ड
भारत को मिली जूडो में ऐतिहासिक जीत
ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को जूडो में एक बड़ी उपलब्धि मिली है। युवा खिलाड़ी अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी इस जीत ने भारतीय जूडो के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है।
अस्मिता की ऐतिहासिक जीत और नया रिकॉर्ड
22 वर्षीय अस्मिता डे ने फाइनल में कनाडा की हेइडी क्वैच को 2-1 से हराकर भारत को जूडो का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड दिलाया। यह मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जिसमें दोनों खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी। प्रारंभिक दौर में क्वैच ने बढ़त बनाई, लेकिन अस्मिता ने शानदार वापसी करते हुए स्कोर बराबर कर दिया। दोनों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला और मुकाबला समय तक बराबरी पर रहा। अंततः गोल्डन स्कोर में अस्मिता ने एक शानदार थ्रो लगाकर जीत हासिल की।
सेमीफाइनल से फाइनल तक का सफर
अस्मिता का सफर आसान नहीं था। सेमीफाइनल में उन्होंने स्कॉटलैंड की सारा एडलिंगटन को हराकर फाइनल में जगह बनाई। यह मुकाबला भी गोल्डन स्कोर तक गया, जहां उन्होंने धैर्य और तकनीक का बेहतरीन प्रदर्शन किया। इससे पहले क्वार्टर फाइनल में उन्होंने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को इप्पोन के जरिए हराया। पूरे टूर्नामेंट में अस्मिता का आत्मविश्वास और आक्रामक खेल स्पष्ट था। उन्होंने हर मुकाबले में संयम बनाए रखा और सही समय पर अंक जुटाकर अपने विरोधियों को पीछे छोड़ दिया।
भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि
अस्मिता डे की यह जीत केवल एक स्वर्ण पदक नहीं है, बल्कि भारतीय जूडो के लिए एक नई शुरुआत मानी जा रही है। भारत कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का गोल्ड जीतने का इंतजार कर रहा था, जिसे अस्मिता ने समाप्त कर दिया। उनकी सफलता से देश के युवा खिलाड़ियों को नई प्रेरणा मिलेगी। ग्लासगो में मिला यह मेडल भारत के अभियान के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अस्मिता इसी तरह प्रदर्शन करती रहीं, तो वे आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भी भारत के लिए पदक जीत सकती हैं।
