इमाम उल हक ने भाई-भतीजावाद के आरोपों पर खोला दिल, साझा की अपनी कठिनाइयाँ
पाकिस्तान क्रिकेट टीम में बदलाव
पाकिस्तान क्रिकेट टीम इस समय चर्चा में है। इंग्लैंड दौरे पर, टीम ने तीसरे टेस्ट से पहले सात खिलाड़ियों में बदलाव किया है। इनमें पूर्व कप्तान इंजमाम उल हक के भतीजे इमाम उल हक का नाम भी शामिल है, जिन्हें चोट के बहाने घर भेजा गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने चोट का बहाना बनाया। इमाम के लिए टीम में जगह बनाना आसान नहीं रहा, क्योंकि जब वह पहली बार टीम में आए थे, तो साथी खिलाड़ी उनसे बात नहीं करते थे और चाचा के नाम पर ताने सुनने पड़ते थे।
पाकिस्तान टीम में खेलना आसान नहीं
पाकिस्तान की टीम में खेलना किसी भी खिलाड़ी के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। जब आप पाकिस्तान के महान कप्तान इंजमाम-उल-हक के रिश्तेदार हों, तो दबाव और भी बढ़ जाता है। इमाम उल हक को 2017 में श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए पहली बार टीम में चुना गया था। इस चयन के बाद, सोशल मीडिया पर भाई-भतीजावाद के आरोप लगने लगे।
सोशल मीडिया की आलोचना से परेशान
इमाम उल हक ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर दीप दासगुप्ता के साथ एक शो में अपनी भावनाएँ साझा की थीं। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें भाई-भतीजावाद के ताने सुनने पड़े और टीम के अन्य खिलाड़ियों से बातचीत नहीं हो पाई। वह टीम में होने के बावजूद अकेला महसूस करते थे और सोशल मीडिया पर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा।
परिवार से भी संपर्क टूट गया
इमाम ने बताया कि वह अकेले खाना खाने को मजबूर हो गए थे और अपने परिवार से भी बात करना बंद कर दिया था। वह नहीं चाहते थे कि उनके परिवार का माहौल खराब हो। स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि उन्होंने अपना फोन अपने मैनेजर को दे दिया।
दबाव के कारण मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित
इमाम ने कहा कि वह अत्यधिक दबाव महसूस कर रहे थे और मानसिक स्वास्थ्य के कारण डिप्रेशन का शिकार हो गए थे। उन्होंने बताया कि वह घंटों तक बाथरूम में छुपकर रोते थे, ताकि कोई उनकी स्थिति के बारे में न जान सके। उन्हें डर था कि अगर उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, तो लोग और भी बातें बनाएंगे।
