कार्तिक करकेरा: डॉक्टर से एशियाई खेलों के मैराथन धावक तक का सफर
एक अनोखी कहानी
कार्तिक करकेरा की यात्रा भारतीय खेलों में एक विशेष स्थान रखती है। 29 वर्षीय ऑर्थोपेडिक सर्जन ने पहले शिक्षा को प्राथमिकता दी और रूस में डॉक्टर बने, लेकिन दौड़ने का जुनून फिर से जाग उठा। केवल दो साल की मैराथन प्रशिक्षण में उन्होंने 2:13:10 का समय हासिल किया और अब एशियाई खेलों में भाग लेने के लिए तैयार हैं।
डॉक्टर से धावक बनने की यात्रा
कार्तिक का बचपन मुंबई के एक मध्यमवर्गीय परिवार में बीता, जहां उन्हें एथलेटिक्स का शौक था। 15 साल की उम्र में उन्हें पढ़ाई और खेल में से एक का चयन करना पड़ा, और उन्होंने पढ़ाई को चुना। 2016 में, उन्होंने MBBS की पढ़ाई के लिए रूस का रुख किया। कोविड के दौरान जब विश्वविद्यालय बंद हुआ, तब उन्हें दौड़ने का समय मिला। उन्होंने रोजाना ट्रैक पर दौड़ना शुरू किया और कई बार 20-25 किलोमीटर की दूरी तय की। 2021 और 2022 में, उन्होंने रूसी विश्वविद्यालय की 1500 मीटर दौड़ में जीत हासिल की। 2023 में, उन्होंने मॉस्को हाफ मैराथन में छठा स्थान प्राप्त किया। भारत लौटने के बाद, नासिक में डॉक्टर की नौकरी के साथ-साथ उन्होंने अपनी ट्रेनिंग जारी रखी।
2026 में कहानी का नया मोड़
2026 में, कार्तिक ने टाटा मुंबई मैराथन में 2:19:55 का समय निकालकर सबसे तेज भारतीय धावक का खिताब जीता। इसके बाद, दिल्ली मैराथन में उन्होंने 2:13:10 का समय निकालकर अनुभवी धावकों को पीछे छोड़ दिया। इसी प्रदर्शन के चलते उन्हें एशियाई खेलों की टीम में स्थान मिला। कार्तिक का कहना है कि लोग इसे त्वरित सफलता मानते हैं, लेकिन इसके पीछे 10 वर्षों की मेहनत है। रिलायंस फाउंडेशन और एडिडास के साथ जुड़े कार्तिक ने केन्या में दुनिया के सबसे तेज मैराथन धावकों के साथ प्रशिक्षण लिया। वहां, उन्होंने 42.195 किलोमीटर की दूरी पर अपनी गति बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित किया।
नागोया में पोडियम की उम्मीद
केन्या से लौटने के बाद, मुरली श्रीशंकर की सलाह पर कार्तिक ने SAI बेंगलुरु में तैयारी की। उन्होंने बताया कि वहां की ट्रेनिंग अच्छी चल रही है और टीम उन्हें जापान के माहौल के लिए भी तैयार कर रही है। अब 26 सितंबर को नागोया में उनका पहला एशियाई खेल मैराथन होगा। जापान के इचिताका यामाशिता और युया योशिदा ने 2:06 का समय निकाला है, जिससे चुनौती आसान नहीं होगी। हालांकि, नागोया की गर्मी और उमस दौड़ को चुनौतीपूर्ण बना सकती है। कार्तिक जानते हैं कि केवल तेज दौड़ना ही काफी नहीं होगा। यदि वे परिस्थितियों को संभालते हैं और संयम बनाए रखते हैं, तो वे रिकॉर्ड सुधारने के साथ-साथ पोडियम की दौड़ में भी रह सकते हैं।
