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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की लॉन बॉल्स में पहली हार

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की लॉन बॉल्स टीम को पहली हार का सामना करना पड़ा। अनुभवी खिलाड़ी पुतुल सोनोवाल को मलेशिया के इज्जत शमीर जुल्केप्ले ने सीधे सेटों में हराया। इस हार के बाद भारत के सेमीफाइनल में पहुंचने की राह कठिन हो गई है। जानें इस मुकाबले की पूरी कहानी और आगे की चुनौतियों के बारे में।
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भारत का अजेय सफर थमा


कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लॉन बॉल्स में भारत की शानदार जीत का सिलसिला थम गया है। अनुभवी खिलाड़ी पुतुल सोनोवाल को सेक्शन D के मुकाबले में मलेशिया के इज्जत शमीर जुल्केप्ले ने सीधे सेटों में हराकर भारत की उम्मीदों को झटका दिया। इस हार के बाद भारत के लिए आगे बढ़ना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।


पहली हार से टूटा अजेय सफर

केल्विनग्रोव लॉन बॉल्स सेंटर में हुए मुकाबले में पुतुल सोनोवाल को 4-8 और 8-9 से हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले भारतीय टीम ने लॉन बॉल्स के सभी मुकाबलों में जीत हासिल की थी। सोनोवाल ने पहले दो मैचों में शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन इस बार मलेशियाई खिलाड़ी ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा। पहले सेट में उन्होंने तेजी से बढ़त बनाई और भारतीय खिलाड़ी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। सोनोवाल ने स्कोर कम करने की कोशिश की, लेकिन पहला सेट 8-4 से उनके हाथ से निकल गया।


दूसरे सेट में वापसी की कोशिश

दूसरे सेट में मुकाबला काफी रोमांचक रहा। सोनोवाल शुरुआत में 0-3 से पीछे हो गए, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी की और मुकाबले को बराबरी की स्थिति में ला दिया। मैच के महत्वपूर्ण क्षण पर उन्होंने अपने कोच से सलाह लेने के लिए टैक्टिकल टाइम-आउट भी लिया। इसके बाद उन्होंने लगातार अच्छे शॉट खेलते हुए स्कोर 8-9 तक पहुंचा दिया। हालांकि, अंतिम एंड में मलेशिया के खिलाड़ी ने दबाव में भी बेहतरीन खेल दिखाया और आवश्यक अंक लेकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इसी जीत के साथ ज़ुल्केप्ले ने मैच 2-0 से जीत लिया।


सेमीफाइनल की राह अब कठिन

इस हार के बाद पुतुल सोनोवाल सेक्शन D में दो जीत और एक हार के साथ दूसरे स्थान पर हैं। वहीं, मलेशिया के इज़्ज़त शमीर जुल्केप्ले ने तीनों मुकाबले जीतकर तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया है। प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार, हर ग्रुप से केवल शीर्ष खिलाड़ी ही सीधे सेमीफाइनल में पहुंचता है। ऐसे में अब सोनोवाल को अपने बाकी दोनों मुकाबले बड़े अंतर से जीतने होंगे। साथ ही, उन्हें यह भी उम्मीद करनी होगी कि ग्रुप के अन्य मुकाबलों के परिणाम उनके पक्ष में आएं। भारत के लिए मेडल की उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है।