कोमल वर्मा: संघर्ष और मेहनत से मिली कुश्ती में सफलता
कोमल वर्मा की प्रेरणादायक कहानी
राजस्थान के सीकर जिले के गणेश्वर गांव की निवासी कोमल वर्मा ने अपनी मेहनत और समर्पण से एक नई पहचान बनाई है। हाल ही में रोहतक में आयोजित अंडर-23 नेशनल रेसलिंग क्वालीफाई ट्रायल में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता, जिससे उन्हें भारतीय टीम में स्थान मिला है। अब, वह 28 अगस्त को रूस में होने वाली अंडर-23 विश्व रेसलिंग चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। कोमल की इस सफलता के पीछे उनकी मेहनत के साथ-साथ उनकी मां का संघर्ष भी है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी बेटी के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। आज यही संघर्ष कोमल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले आया है।
मां के साथ एकेडमी में शुरू हुआ सफर
कोमल की मां एक रेसलिंग एकेडमी में रोजाना 60 से 70 खिलाड़ियों के लिए खाना बनाती हैं। बचपन में कोमल भी अक्सर अपनी मां के साथ एकेडमी जाती थीं। वहां पहलवानों को अभ्यास करते देख उनके मन में कुश्ती सीखने की इच्छा जागृत हुई। धीरे-धीरे यह रुचि उनके सपने में बदल गई और उन्होंने अखाड़े में उतरकर अपने सफर की शुरुआत की।
कठिनाइयों के बावजूद मेहनत जारी
कोच और मैनेजर अंकित तंवर के अनुसार, कोमल आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आती हैं। उनके पिता पहले मजदूरी करते थे, लेकिन बाद में गृहस्थ जीवन छोड़ दिया। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां ने संभाली। कठिन परिस्थितियों के बावजूद, कोमल ने अपने अभ्यास को जारी रखा। इसी मेहनत का फल यह रहा कि उन्होंने रोहतक में लगातार पांच मुकाबले जीतकर फाइनल तक का सफर तय किया और सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
13 साल की उम्र से कुश्ती में पसीना बहाया
कोमल ने केवल 13 वर्ष की आयु में गणेश्वरधाम स्थित अखाड़े में कुश्ती की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने लगातार अपनी तकनीक और प्रदर्शन में सुधार किया। वर्षों की मेहनत ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। आज वह भारतीय महिला कुश्ती की उभरती हुई प्रतिभाओं में से एक मानी जाती हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते
कोमल अंडर-17 विश्व चैंपियनशिप में दो कांस्य पदक जीत चुकी हैं। इसके अलावा, बहरीन में आयोजित एशियन यूथ गेम्स में भी उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया है। विभिन्न आयु वर्ग की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वह अब तक 10 पदक जीत चुकी हैं। उनका पसंदीदा दांव 'कलाजंग' है, जिसकी मदद से उन्होंने विश्व कैडेट चैंपियनशिप में कई देशों की पहलवानों को हराकर पदक हासिल किया।
ओलंपिक पदक जीतने का सपना
रूस में होने वाली अंडर-23 विश्व रेसलिंग चैंपियनशिप के लिए कोमल पूरी तैयारी में हैं। उनका कहना है कि यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ है, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य 2028 ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है। परिवार के संघर्ष और अपनी मेहनत के बल पर, कोमल आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
