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खेलो इंडिया योजना: भारत में खेल प्रतिभाओं का विकास और बजट का प्रभाव

खेलो इंडिया योजना, जो अक्टूबर 2017 में शुरू हुई, भारत में खेल प्रतिभाओं के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के तहत खिलाड़ियों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बेहतर अवसर प्रदान किए जाते हैं। 2019-20 से 2025-26 के बीच, इस योजना के तहत हजारों एथलीटों का चयन किया गया है, जिसमें हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। हालांकि, छोटे राज्यों की प्रतिभाओं को भी पहचानने की आवश्यकता है। इस लेख में खेलो इंडिया योजना के बजट, राज्यों के प्रदर्शन और खिलाड़ियों की संख्या पर विस्तृत जानकारी दी गई है।
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खेलो इंडिया योजना का महत्व

विकसित देशों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए उत्कृष्ट स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और विभिन्न योजनाएं लागू की जाती हैं। इनकी मदद से ये देश ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। भारत ने भी खेलों को प्रोत्साहित करने और नई प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए 'खेलो इंडिया' कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसे अक्टूबर 2017 में लॉन्च किया गया। यह योजना भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों की पहचान करना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर प्रदान करना है.


खेलो इंडिया एथलीटों की संख्या

इस योजना के तहत चयनित खिलाड़ियों को खेलो इंडिया एथलीट (KIA) कहा जाता है। प्रत्येक एथलीट को सरकार द्वारा हर साल 6.28 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसमें हर महीने 10,000 रुपये का जेब खर्च भी शामिल है। 2019-20 में 2,711 एथलीटों को इस सहायता के लिए चुना गया था, जबकि 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 2,905 हो गई है। इसका मतलब है कि सरकार इन एथलीटों को सीधे दी जाने वाली सहायता पर लगभग 182.43 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इसके अलावा, खेलो इंडिया योजना के तहत खेल इंफ्रास्ट्रक्चर, कोचिंग और प्रशिक्षण सुविधाओं पर भी करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं.


राज्यों के बीच समानता का सवाल

जब से यह योजना शुरू हुई है, तब से इसमें हजारों करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इस पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सभी राज्यों को समान अवसर मिला? जिन राज्यों को अधिक खिलाड़ी, बेहतर सुविधाएं और अधिक सहायता मिली, क्या वही सबसे अधिक मेडल विजेता भी बने? और छोटे राज्यों में छिपी प्रतिभाओं को क्या उतना ही समर्थन मिला, जितना बड़े राज्यों के खिलाड़ियों को?


खेलो इंडिया एथलीटों की संख्या में वृद्धि

राज्य सभा के अतारांकित प्रश्न संख्या 797 के लिए 5 फरवरी 2026 को दिए गए उत्तर के अनुसार, खेलो इंडिया योजना के तहत 2019-20 से 2025-26 तक के आंकड़े बताते हैं कि देश में खेल प्रतिभाओं को लगातार बढ़ावा मिल रहा है। 2019-20 में इस योजना से 2,711 खिलाड़ी जुड़े थे, जो 2020-21 में बढ़कर 3,030 हो गए। इसके बाद कुछ वर्षों तक खिलाड़ियों की संख्या 2,750 से 2,850 के बीच बनी रही, लेकिन 2025-26 में यह आंकड़ा फिर से 2,905 हो गया।


राज्यों का प्रदर्शन

खेलो इंडिया योजना: भारत में खेल प्रतिभाओं का विकास और बजट का प्रभाव


बड़े राज्यों में हरियाणा लगातार सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य बना हुआ है। 2025-26 में हरियाणा के 514 खेलो इंडिया एथलीट चुने गए, जो किसी भी राज्य में सबसे अधिक हैं। इसके बाद महाराष्ट्र के 314, उत्तर प्रदेश के 189, तमिलनाडु के 186, राजस्थान के 168 और कर्नाटक के 164 एथलीट चुने गए हैं.


छोटे राज्यों का योगदान

छोटे राज्यों का प्रदर्शन भी कई मामलों में आश्चर्यजनक रहा है। मणिपुर, जो कम आबादी वाला राज्य है, खेलो इंडिया योजना में लगातार उत्कृष्ट भागीदारी दिखा रहा है। 2025-26 में यहां के 124 खेलो इंडिया एथलीट चुने गए हैं। ओडिशा और झारखंड जैसे छोटे राज्यों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है, जबकि सिक्किम, लद्दाख, लक्षद्वीप, नागालैंड और अंडमान-निकोबार जैसे छोटे राज्य अभी भी कम संख्या में एथलीट तैयार कर पा रहे हैं.


खेलो इंडिया का बजट

राज्य सभा के अतारांकित प्रश्न संख्या 154 के 29 जनवरी 2026 को दिए गए उत्तर के अनुसार, खेलो इंडिया योजना के बजट में लगातार वृद्धि हुई है। 2016-17 में इसके लिए 118.10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इसके बाद 2017-18 में बजट बढ़कर 350 करोड़ रुपये और 2018-19 में 500.09 करोड़ रुपये हो गया। 2019-20 में पहली बार बजट 578 करोड़ रुपये के पार पहुंचा। कोरोना महामारी के दौरान 2020-21 में बजट घटकर 328.77 करोड़ रुपये रह गया, लेकिन सरकार ने 338.06 करोड़ रुपये खर्च किए।


राज्यों की सफलता

खेलो इंडिया योजना: भारत में खेल प्रतिभाओं का विकास और बजट का प्रभाव


कोरोना महामारी के बाद सरकार ने खेलो इंडिया पर खर्च बढ़ाने की गति तेज कर दी। 2021-22 में इस योजना के लिए 869 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया, जो अब तक का सबसे बड़ा आवंटन था। हालांकि, इसमें से 764.29 करोड़ रुपये ही खर्च हो सके। 2022-23 में 600 करोड़ रुपये में से 596.39 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 2023-24 में 880 करोड़ रुपये के बजट में से 872.20 करोड़ रुपये खर्च हुए।


खेलो इंडिया का प्रभाव

खेलो इंडिया योजना: भारत में खेल प्रतिभाओं का विकास और बजट का प्रभाव


खेलो इंडिया योजना के तहत एथलीटों का चयन 2019-20 से शुरू हुआ। इसलिए 2018 और 2023 एशियन गेम्स, 2018 और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स, टोक्यो ओलंपिक 2020 और नेशनल गेम्स 2022 और 2023 के नतीजों को सीधे खेलो इंडिया से जोड़ना सही नहीं होगा। पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत ने 6 पदक जीते, जिसमें हरियाणा के 2, महाराष्ट्र, पंजाब और दिल्ली के 1-1 खिलाड़ी शामिल थे.


खेलो इंडिया के तहत एथलीटों की संख्या

2019-20 से 2023-24 के बीच खेलो इंडिया के तहत 14,068 एथलीट चुने गए। इनमें सबसे ज्यादा हरियाणा (2,104), महाराष्ट्र (1,839), दिल्ली (1,023), मणिपुर (878) और कर्नाटक (750) के खिलाड़ी थे। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्य खेलो इंडिया में भी आगे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं.


नेशनल गेम्स में प्रदर्शन

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2019-20 से 2025-26 के बीच खेलो इंडिया योजना के तहत सबसे ज्यादा एथलीट तैयार करने वाले राज्यों का असर नेशनल गेम्स 2025 में भी स्पष्ट रूप से देखा गया। हरियाणा ने सबसे ज्यादा 3,108 एथलीट तैयार किए और 153 मेडल जीतकर तीसरे स्थान पर रहा। हालांकि, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मणिपुर और राजस्थान ने बड़ी संख्या में एथलीट तैयार किए, लेकिन मेडल के मामले में वे टॉप-10 में जगह नहीं बना सके.