गौतम गंभीर: क्रिकेटर बनने से पहले का सपना था सेना में शामिल होना
गौतम गंभीर का क्रिकेट सफर और सपना
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के प्रमुख कोच गौतम गंभीर उन खिलाड़ियों में से एक हैं, जिन्होंने अपने अद्वितीय खेल कौशल से लाखों भारतीयों का दिल जीता है। 2007 के टी20 वर्ल्ड कप और 2011 के वनडे वर्ल्ड कप में उनकी शानदार पारियां आज भी उनके प्रशंसकों के मन में ताजा हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनका सपना क्रिकेटर बनने का नहीं था? आज गौतम गंभीर का जन्मदिन है, आइए जानते हैं कि वे क्रिकेटर बनने के बजाय क्या बनना चाहते थे।
गौतम गंभीर का सेना में जाने का सपना:
गौतम गंभीर ने एक बार साझा किया था कि क्रिकेट उनके लिए पहला प्यार नहीं था। उनका असली सपना भारतीय सेना में शामिल होना था, क्योंकि वे देश की सेवा करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि अगर 12वीं कक्षा में रणजी ट्रॉफी में क्रिकेट नहीं खेलते, तो वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में दाखिला लेने की कोशिश करते। सेना में शामिल न हो पाने का उन्हें हमेशा अफसोस रहा, लेकिन क्रिकेट के मैदान पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने कई यादगार जीत दिलाईं।
शहीद जवानों के बच्चों की सहायता के लिए उठाया कदम:
हालांकि उनका सपना सेना में जाने का पूरा नहीं हुआ, लेकिन गंभीर ने देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रयास किया। उन्होंने शहीद जवानों के परिवारों की मदद के लिए एक फाउंडेशन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य शहीदों के बच्चों की शिक्षा और देखभाल में सहायता करना है। गौतम ने बताया कि उनका फाउंडेशन 50 बच्चों की मदद कर रहा था और वे इसे बढ़ाकर 100 करना चाहते थे। यह उनकी देश सेवा की भावना को दर्शाता है, जो क्रिकेट तक सीमित नहीं है।
गौतम गंभीर का क्रिकेट करियर:
गंभीर ने 2003 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। शुरुआत में उन्हें टीम में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा, लेकिन लगातार अच्छे प्रदर्शन के चलते उन्होंने अपनी पहचान बनाई। वीरेंद्र सहवाग के साथ उनकी ओपनिंग जोड़ी भी काफी सफल रही। टेस्ट क्रिकेट में गंभीर ने 58 मैचों में 4,154 रन बनाए, जिसमें नौ शतक और 22 अर्धशतक शामिल हैं। 2008-09 के दौरान उनका प्रदर्शन शानदार रहा और 2009 में उन्हें ICC टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर का खिताब मिला।
