ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलेटिक्स की ऐतिहासिक जीत
भारतीय पैरा एथलेटिक्स की नई उपलब्धि
ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलेटिक्स ने एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। पुरुषों की F57 शॉटपुट प्रतियोगिता में सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि शुभम जुयाल ने रजत पदक हासिल किया, जिससे भारत ने इस इवेंट में पहली बार स्वर्ण और डबल पोडियम फिनिश प्राप्त किया। दोनों खिलाड़ियों ने फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया और देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
सोमन राणा की सफलता की कहानी
43 वर्षीय सोमन राणा ने अपने चौथे प्रयास में 13.40 मीटर की दूरी तक गोला फेंककर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। शुभम जुयाल ने 13.28 मीटर की दूरी तक गोला फेंककर रजत पदक जीता। यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पहला अवसर है जब भारत ने पुरुषों की F57 शॉटपुट इवेंट में स्वर्ण पदक जीता और पहले तथा दूसरे स्थान पर भी कब्जा जमाया।
सोमन राणा का परिचय
सोमन राणा भारतीय सेना में हवलदार के पद पर कार्यरत हैं। उनका खेलों में सफर मुक्केबाजी से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने 2005 की राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप में पांचवां स्थान प्राप्त किया। 2006 में जम्मू-कश्मीर में तैनाती के दौरान एक बारूदी सुरंग विस्फोट में उन्होंने एक पैर खो दिया। इस कठिनाई ने उनकी जिंदगी को बदल दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
शुभम जुयाल की प्रेरणादायक यात्रा
उत्तराखंड के रुड़की से आने वाले शुभम जुयाल का सपना सेना में अधिकारी बनने का था। उन्होंने 2022 में आर्मी कैडेट कॉलेज की परीक्षा पास की, लेकिन एक सड़क दुर्घटना में उनका पैर काटना पड़ा। इसके बाद उन्होंने पैरा खेलों में करियर बनाने का निर्णय लिया और पुणे के आर्टिफिशियल लिम्ब सेंटर में इलाज के दौरान सेना के पैरालंपिक नोड में प्रशिक्षण लेना शुरू किया।
