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ज्ञानेश्वरी यादव ने Commonwealth Games 2026 में वेटलिफ्टिंग में रचा इतिहास

ग्लासगो में चल रहे Commonwealth Games 2026 में भारत की ज्ञानेश्वरी यादव ने वेटलिफ्टिंग में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए सिल्वर मेडल जीता। 53 किलोग्राम वर्ग में उन्होंने कुल 199 किलोग्राम वजन उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी इस उपलब्धि पर बधाई दी। जानें, कैसे ज्ञानेश्वरी ने अपने पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में यह सफलता हासिल की और उनके भावनात्मक अनुभव के बारे में।
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भारत की ज्ञानेश्वरी यादव का ऐतिहासिक प्रदर्शन


ग्लासगो में आयोजित Commonwealth Games 2026 में भारत की ज्ञानेश्वरी यादव ने वेटलिफ्टिंग में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। 53 किलोग्राम वर्ग में उन्होंने सिल्वर मेडल जीतकर एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। उनके इस अद्भुत प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।


सिल्वर मेडल और नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

23 वर्षीय ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं की 53 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम वजन उठाया। यह उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा और इस उपलब्धि के साथ भारत ने Commonwealth Games 2026 में अपना पांचवां पदक हासिल किया। गोल्ड मेडल नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला डिडिह ने 206 किलोग्राम वजन उठाकर जीता, जबकि कनाडा की रेबेका ग्रौलक्स ने 178 किलोग्राम के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया।


प्रधानमंत्री मोदी की बधाई

ज्ञानेश्वरी की इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता विशेष है क्योंकि ज्ञानेश्वरी ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री ने लिखा कि उनकी मेहनत और समर्पण देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगा। खेल प्रेमियों और वेटलिफ्टिंग समुदाय ने भी ज्ञानेश्वरी की इस उपलब्धि की सराहना की।


भावुक ज्ञानेश्वरी की प्रतिक्रिया

मेडल जीतने के बाद ज्ञानेश्वरी यादव ने कहा कि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था और उनका मुख्य लक्ष्य व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना था। उन्होंने बताया कि गोल्ड जीतने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन मुकाबला कठिन था। उन्होंने कहा कि सिल्वर मेडल और नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड उनके लिए गर्व का क्षण है। ज्ञानेश्वरी ने अपनी तैयारी का श्रेय अपनी टीम और कोचिंग स्टाफ को दिया। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने से बर्मिंघम में ट्रेनिंग चल रही थी, जिसका लाभ उन्हें प्रतियोगिता में मिला। उन्होंने यह भी कहा कि मीराबाई चानू का गोल्ड मेडल देखकर उन्हें अतिरिक्त प्रेरणा मिली और उसी जोश के साथ उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।