टेकबॉल: एशियन गेम्स 2026 में भारत की नई उम्मीद
टेकबॉल में भारत की शुरुआत
एशियन गेम्स 2026 का आयोजन शुरू हो चुका है, और भारत को पहला मेडल एक ऐसे खेल से मिल सकता है, जिसके बारे में देश में बहुत कम लोग जानते हैं। यह खेल है टेकबॉल। क्विम्सी डिसूजा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो ब्रॉन्ज मेडल मुकाबलों में अपनी जगह बनाई है।
जापान की शीर्ष खिलाड़ी को हराकर किया कमाल
क्विम्सी डिसूजा ने महिला सिंगल्स में अपने सफर की शुरुआत जापान की यूइना सकामोटो के खिलाफ की। पहले गेम में 10-12 से हारने के बाद, भारतीय खिलाड़ी ने जोरदार वापसी की और अगले दो गेम 12-11, 13-11 से जीत लिए। इसके बाद, उन्होंने कंबोडिया की कोएम्येन डीवाई को 12-9, 12-7 से हराकर ग्रुप में शीर्ष स्थान प्राप्त किया और सेमीफाइनल में पहुंच गईं।
सेमीफाइनल में मिली हार
सेमीफाइनल में क्विम्सी का मुकाबला इंडोनेशिया की इमा सुमाया से हुआ। भारतीय खिलाड़ी ने पहला गेम 12-7 से जीता, लेकिन सुमाया ने अगले दो गेम 12-9 और 12-7 से जीतकर मुकाबला पलट दिया। अब क्विम्सी महिला सिंगल्स के ब्रॉन्ज मेडल मैच में फिर से जापान की यूइना सकामोटो से भिड़ेंगी। इसके अलावा, मिक्स्ड डबल्स में मोहम्मद अनस इमरान बेग के साथ उनकी जोड़ी भी ब्रॉन्ज के लिए खेलेगी।
टेकबॉल क्या है और इसे कैसे खेला जाता है?
टेकबॉल को सरल भाषा में फुटबॉल और टेबल टेनिस का संयोजन कहा जा सकता है। इसमें एक घुमावदार टेबल होती है और खिलाड़ी हाथों का उपयोग नहीं करते। गेंद को पैर, घुटने, जांघ, छाती और सिर से खेला जाता है। एक खिलाड़ी को गेंद लौटाने से पहले अधिकतम तीन टच मिलते हैं और लगातार एक ही बॉडी पार्ट का उपयोग नहीं किया जा सकता। इस खेल में नियंत्रण, समय और गेंद पर पकड़ बहुत महत्वपूर्ण होती है। टेकबॉल की शुरुआत हंगरी के बुडापेस्ट में हुई थी और यह 2026 एशियन गेम्स में पहली बार शामिल किया गया है।
