तेजस्विन शंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में डीकैथलॉन में कांस्य पदक जीता
तेजस्विन शंकर का ऐतिहासिक प्रदर्शन
नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर ने एक अद्वितीय उपलब्धि हासिल की है। वे पहले भारतीय पुरुष एथलीट बने हैं, जिन्होंने डीकैथलॉन इवेंट में मेडल जीता है। 27 वर्षीय तेजस्विन ने कांस्य पदक प्राप्त कर भारत का नाम रोशन किया। हालांकि, उन्हें घुटने की चोट का सामना करना पड़ा, जिसने उनकी तैयारी को प्रभावित किया।
इसके बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और 10 इवेंट्स में शानदार प्रदर्शन किया। कुल 7976 पॉइंट्स के साथ उन्होंने कांस्य पदक पर कब्जा किया। आइए जानते हैं अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन कैसा रहा…
Tejaswin Shankar makes history by becoming the first Indian to win a medal in Men's Decathlon at the Commonwealth Games. He clocked a 4:36.19 to accumulate 704 points in the 10th and final event for a total of 7976 points to win the bronze medal pic.twitter.com/4VWhoG2yUM
— News Media (@news_media) July 31, 2026
चोट और वापसी की कहानी
प्रतियोगिता की शुरुआत में तेजस्विन को हाई जंप इवेंट में चोट का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी आगे की भागीदारी पर सवाल उठ गए थे। 100 मीटर स्प्रिंट में वे अंतिम स्थान पर रहे, लेकिन लॉन्ग जंप में उन्होंने 7.82 मीटर का व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाया। हाई जंप में वे एकमात्र खिलाड़ी थे जिन्होंने 2 मीटर की ऊंचाई पार की।
400 मीटर में चौथा स्थान, दूसरे दिन हर्डल्स में दूसरा स्थान और जेवलिन थ्रो में 53.12 मीटर के प्रयास ने उन्हें तीसरे स्थान पर पहुंचा दिया। पोल वॉल्ट में आठवें स्थान के बावजूद, उन्होंने शानदार वापसी की। यह जीत साबित करती है कि मेहनत और जज्बे के आगे कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। तेजस्विन शंकर की यह उपलब्धि युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा बन गई है।
#WATCH | Glasgow, Scotland: Indian athlete Tejaswin Shankar says, "It feels good not to be returning empty-handed; I am very happy... if we look back to two days before the decathlon, I wasn't even in a position to compete, given the sudden flare-up in my leg. I didn't expect to… https://t.co/Rv0di0MY3f pic.twitter.com/Ltd8bYKCm4
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तेजस्विन शंकर का बयान
तेजस्विन शंकर ने कहा, "खाली हाथ लौटना अच्छा नहीं लगता; मैं बहुत खुश हूं... अगर हम डेकाथलॉन से दो दिन पहले की बात करें, तो मेरे पैर में अचानक तकलीफ बढ़ गई थी, जिससे मैं मुकाबला करने की स्थिति में नहीं था। मुझे इस नतीजे की उम्मीद नहीं थी। मैंने सीखा कि हर दिन को एक बार में देखना चाहिए, एक सेशन, एक घंटे और एक कदम पर ध्यान देना चाहिए। इसी सोच के साथ मैंने डेकाथलॉन की शुरुआत की। हर इवेंट में मेरा ध्यान उस एक थ्रो, रेप या जंप पर था; मैं उस पल में बना रहा और उसे सही ढंग से कर पाया..."
अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन
ग्रेनाडा के लिंडन विक्टर ने 8096 पॉइंट्स के साथ स्वर्ण पदक जीता। कनाडा के डेमियन वार्नर ने 8036 पॉइंट्स के साथ रजत पदक हासिल किया। तेजस्विन ने तीसरे स्थान पर रहकर भारतीय दल की मेडल तालिका में योगदान दिया।
