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धीरज बोम्मादेवरा ने वर्ल्ड कप फाइनल में गोल्ड जीतकर रचा इतिहास

भारतीय रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने वर्ल्ड कप फाइनल में गोल्ड मेडल जीतकर एक नया इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि उन्हें पहले भारतीय पुरुष रिकर्व आर्चर बनाती है, जिसने इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। धीरज ने जापान के नाकानिशी जुन्या को कड़े मुकाबले में हराया, जिसमें शूट-ऑफ निर्णायक साबित हुआ। इस जीत के साथ, उन्होंने 16 साल का इंतजार खत्म किया है। जानें इस ऐतिहासिक जीत के बारे में और धीरज की आगामी योजनाओं के बारे में।
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धीरज बोम्मादेवरा की ऐतिहासिक जीत

नई दिल्ली: भारतीय रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने रविवार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। उन्होंने वर्ल्ड कप फाइनल में गोल्ड मेडल जीतकर पहले भारतीय पुरुष रिकर्व आर्चर बनने का गौरव प्राप्त किया। इस रोमांचक मुकाबले में धीरज ने शूट-ऑफ में जापान के नाकानिशी जुन्या को हराया।


धीरज, जो कि दुनिया के नंबर-10 तीरंदाज हैं, ने 2023 और 2024 के वर्ल्ड कप फाइनल में पदक से चूकने के बाद इस बार शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में जीत हासिल करने के बाद फाइनल में दुनिया के नंबर-20 नाकानिशी को 6-5 से हराया। पांच सेट के बाद दोनों खिलाड़ी 5-5 की बराबरी पर थे, जिसके बाद शूट-ऑफ में धीरज ने 10-9 से जीत दर्ज की।


इस जीत के साथ, धीरज वर्ल्ड कप फाइनल में व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग का गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष तीरंदाज बन गए हैं। उन्होंने इस प्रतियोगिता में किसी भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज के पदक जीतने का 16 साल का इंतजार खत्म किया। इससे पहले, जयंत तालुकदार ने 2010 में एडिनबर्ग में वर्ल्ड कप फाइनल में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।


धीरज, जो वर्ल्ड कप फाइनल में गोल्ड जीतने वाले दूसरे भारतीय तीरंदाज हैं, उनसे पहले डोला बनर्जी ने 2007 में दुबई में महिलाओं का व्यक्तिगत खिताब जीता था। वहीं, दीपिका कुमारी ने इस प्रतियोगिता में सबसे ज्यादा पदक जीते हैं, जिसमें पांच सिल्वर और एक ब्रॉन्ज शामिल हैं।


फाइनल में नाकानिशी ने शानदार शुरुआत की और धीरज पर दबाव बनाया। सेमीफाइनल में टोक्यो ओलंपिक चैंपियन मेटे गाजोज को हराने वाले जापानी तीरंदाज ने शुरुआती छह तीरों में केवल तीन अंक गंवाए और 3-1 की बढ़त बना ली।


हालांकि, धीरज ने तीसरे सेट में 29 अंक बनाकर स्कोर 3-3 से बराबर कर दिया। चौथे सेट में नाकानिशी ने अपने तीनों तीर सटीक निशाने पर लगाए और 5-3 की बढ़त हासिल की। इसके बाद, जापानी तीरंदाज को स्वर्ण पदक जीतने के लिए पांचवें सेट में केवल ड्रॉ की जरूरत थी।


लेकिन धीरज ने दबाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए पांचवें सेट में केवल दो अंक गंवाए। नाकानिशी 27 अंक ही बना सके, जिससे मुकाबला 5-5 की बराबरी पर पहुंच गया और फैसला शूट-ऑफ में हुआ। शूट-ऑफ में धीरज ने 10 अंक का निशाना साधा, जबकि नाकानिशी 9 अंक ही हासिल कर सके। इस प्रकार, भारतीय तीरंदाज ने ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।


अब, वर्ल्ड कप फाइनल में इस ऐतिहासिक जीत के बाद, धीरज जापान में होने वाले एशियन गेम्स की तैयारी के लिए रवाना होंगे। वह इन खेलों में भारत की रिकर्व टीम की अगुवाई करेंगे। हांग्जो एशियन गेम्स में धीरज व्यक्तिगत स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल में हार गए थे, लेकिन टीम स्पर्धा में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था।