नीरू ढांडा की एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने की प्रेरणादायक कहानी
नीरू ढांडा की अद्वितीय उपलब्धि
हरियाणा के जींद की 26 वर्षीय नीरू ढांडा के लिए एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक केवल एक पुरस्कार नहीं है, बल्कि यह कठिनाइयों पर विजय पाने की कहानी है। भारतीय सेना में नायब सूबेदार नीरू को प्रतियोगिता से लगभग 10 दिन पहले भोपाल के अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। तेज बुखार के कारण वह पांच दिन तक भोजन नहीं कर सकीं। फिर भी, उन्होंने खुद को संभाला और मंगलवार को बारिश में महिला ट्रैप फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को ऐतिहासिक स्वर्ण दिलाया।
बीमारी से उबरकर मैदान में वापसी
एशियन गेम्स से लगभग 10 दिन पहले नीरू को भोपाल में तेज बुखार हुआ, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इस दौरान, उन्हें पांच दिन तक खाना नहीं मिला। H1N1 का भी संदेह था। ऐसे में उनकी फिटनेस और प्रतियोगिता में भाग लेने को लेकर सवाल उठ रहे थे। उनके निजी कोच मंशेर सिंह ने उन्हें सलाह दी कि वह अपनी परेशानियों को भुलाकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें। नीरू ने भी यही किया।
बारिश में भी निशाना साधने में सफल
शूटिंग रेंज में लगातार बारिश और खराब दृश्यता के कारण क्ले टारगेट देखना चुनौतीपूर्ण था। तापमान भी गिर रहा था। इसके बावजूद, नीरू ने क्वालिफिकेशन के पहले चार राउंड में 100 में से 95 निशाने लगाए। पांचवें राउंड में उन्होंने 23 अंक प्राप्त किए। कुल 118 अंकों के साथ, उन्होंने फाइनल में जगह बनाई। इसके बाद, आठ निशानेबाजों के बीच मुकाबले में भी उन्होंने संयम बनाए रखा।
स्वर्ण पदक की ओर अंतिम निशाने
फाइनल में नीरू ने चीन की सुन युनोंग पर बढ़त बनाए रखी। मुकाबले के दौरान उन्हें येलो कार्ड भी दिखाया गया, जिससे कुछ समय के लिए निर्णय पर चर्चा हुई। लेकिन नीरू ने वापसी की और अंतिम पांच टारगेट पर सटीक निशाना लगाया। उनका स्कोर 28/30 रहा, जबकि सुन युनोंग ने 26 और कुवैत की अब्दुलमलिक हाजर ने 21 निशाने लगाए। इस तरह, नीरू ने स्वर्ण पदक जीत लिया।
टीम सिल्वर के बाद व्यक्तिगत स्वर्ण
नीरू ने इसी दिन महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में भी भारत को रजत दिलाने में योगदान दिया। नीरू ने 118, आशीमा अहलावत ने 106 और मनीषा कीर ने 104 अंक बनाए। भारत का कुल स्कोर 328 रहा। नीरू ने 2017 में मध्य प्रदेश शूटिंग अकादमी में शामिल होने के बाद इस खेल में प्रगति की। उनके चचेरे भाई और 2018 एशियन गेम्स के सिल्वर मेडलिस्ट लक्ष्य श्योराण उनके लिए प्रेरणा बने। अब नीरू की नजर ओलंपिक पर है और उन्होंने अपना स्वर्ण भारतीय जवानों को समर्पित किया है।
