पिंकी बलहारा ने एशियन गेम्स 2026 में कुराश में जीता कांस्य पदक
भारत की पिंकी बलहारा का कांस्य पदक जीतना
एशियन गेम्स 2026 में भारत की पिंकी बलहारा ने कुराश में कांस्य पदक हासिल कर इस खेल को फिर से चर्चा में ला दिया है। विमेंस -78 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में उन्हें दक्षिण कोरिया की मो सुमिन के खिलाफ 0-5 से हार का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। कुराश, जो देखने में कुश्ती के समान है, के नियम और खेलने की विधि काफी भिन्न हैं। आइए इस खेल की कुछ विशेषताओं पर नजर डालते हैं।
कुराश का प्राचीन इतिहास
कुराश को विश्व की प्राचीन मार्शल आर्ट परंपराओं में से एक माना जाता है। इंटरनेशनल कुराश एसोसिएशन के अनुसार, इसकी परंपरा लगभग 3,500 साल पुरानी है। प्राचीन समय में इसका उपयोग सैन्य प्रशिक्षण के साथ-साथ त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों में भी किया जाता था। आज के समय में, यह खेल संगठित नियमों के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शामिल हो चुका है।
कुश्ती से मुकाबले की विधि में भिन्नता
हालांकि कुराश और कुश्ती देखने में कुछ हद तक समान लग सकते हैं, लेकिन दोनों के बीच महत्वपूर्ण अंतर है। कुराश में मुकाबला खड़े होकर किया जाता है और जमीन पर लड़ाई नहीं होती। खिलाड़ी अपने प्रतिद्वंद्वी की जैकेट पकड़कर विभिन्न तकनीकों से उन्हें मैट पर गिराने का प्रयास करते हैं। जैसे ही कोई खिलाड़ी गिरता है, मुकाबला रोक दिया जाता है और फिर से खड़े होकर शुरू होता है।
अंक प्राप्ति का तरीका
कुराश में अंक थ्रो की प्रभावशीलता और प्रतिद्वंद्वी पर नियंत्रण के आधार पर मिलते हैं। इसके प्रमुख स्कोर में खलोल, योंबोश और चाला शामिल हैं। खलोल को सबसे प्रभावी थ्रो माना जाता है, जिसमें प्रतिद्वंद्वी को नियंत्रित तरीके से पीठ के बल गिराया जाता है। योंबोश में थ्रो प्रभावी होता है, लेकिन नियंत्रण या लैंडिंग में कमी हो सकती है। चाला को कम प्रभावी थ्रो माना जाता है।
कुराश में पाबंदियाँ
कुराश में मुक्का और किक मारना निषिद्ध है। गला दबाने, दर्द देने वाले लॉक या होल्ड लगाने और बेल्ट के नीचे पकड़ने पर भी रोक है। इसलिए, इस खेल में केवल ताकत का उपयोग नहीं होता, बल्कि सही पकड़, समय और थ्रो की तकनीक भी महत्वपूर्ण होती है। इंटरनेशनल कुराश एसोसिएशन की स्थापना 1998 में हुई थी, जिसके बाद इस खेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा मिला और यह एशियन गेम्स का हिस्सा बन गया।
