प्रवीण चित्रवेल की सफलता: तमिलनाडु के गांव में खुशी की लहर
गांव में खुशी का माहौल
तमिलनाडु के सेट्टीसथिरम गांव में एक साधारण दिहाड़ी मजदूर के घर में खुशी का माहौल बन गया, जब भारतीय एथलीट प्रवीण चित्रवेल ने 2026 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में मेन्स ट्रिपल जम्प इवेंट में सिल्वर मेडल जीता। प्रवीण के पिता चित्रवेल ने अपने बेटे की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर गर्व महसूस करते हुए परिवार के संघर्ष को याद किया।
पिता का संघर्ष और सपने
उन्होंने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा, 'मैं खेतों में दिहाड़ी मजदूर हूं। मैंने अपनी मेहनत से अपने बच्चों को पढ़ाया और उनके सपनों को पूरा करने में हर संभव मदद की।'
प्रवीण की खेल यात्रा के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं उसे हमेशा अपनी साइकिल पर लेकर जाता था। मैंने उसे धीरे-धीरे दुनिया दिखाई और वह कदम दर कदम आगे बढ़ता गया, अंततः अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया।'
सिल्वर मेडल पर गर्व
प्रवीण ने शनिवार को ठंड के बीच 16.58 मीटर की कूद लगाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। वह गोल्ड मेडल जीतने से बेहद मामूली अंतर से चूक गए। उनके पिता ने कहा कि परिवार को गोल्ड मेडल की उम्मीद थी, लेकिन बेटे की उपलब्धि पर उन्हें गर्व है।
'वह बहुत मामूली अंतर से गोल्ड से चूक गया, लेकिन अगली बार मेरा बेटा निश्चित रूप से गोल्ड मेडल जीतेगा और भारत के साथ तमिलनाडु का नाम रोशन करेगा।'
गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा
चित्रवेल की बेटी एक शिक्षिका हैं और उनके दोनों बेटे एथलीट हैं। उन्होंने प्रवीण की सफलता का श्रेय पूरे गांव को दिया। उन्होंने कहा, 'इस गांव के युवाओं ने उसे अपने बच्चे की तरह प्रोत्साहित किया। शिक्षकों, रिश्तेदारों और पूरे गांव ने मुझे मार्गदर्शन दिया। उनकी मदद से मेरा बेटा लगातार आगे बढ़ता गया।'
प्रवीण पहले एशियन गेम्स में भी ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं। उनके पिता ने उम्मीद जताई कि बेटे की सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी। उन्होंने कहा, 'मैं प्रार्थना करता हूं कि अगली बार मेरा बेटा गोल्ड मेडल जीते और यहां के कम से कम दस और युवा खेलों को अपनाकर देश का नाम रोशन करें।'
