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माइक प्रॉक्टर: क्रिकेट के दिग्गज ऑलराउंडर की अनोखी कहानी

माइक प्रॉक्टर, दक्षिण अफ्रीका के एक अद्वितीय ऑलराउंडर, ने केवल 7 टेस्ट मैचों में अपनी तेज गेंदबाजी और उपयोगी बल्लेबाजी से क्रिकेट की दुनिया में एक खास पहचान बनाई। 1969-70 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी शानदार गेंदबाजी ने उन्हें दिग्गज बना दिया। काउंटी क्रिकेट में भी उन्होंने कई रिकॉर्ड बनाए और बाद में क्रिकेट प्रशासन में भी सक्रिय रहे। जानें उनके जीवन और करियर की अनोखी कहानी।
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क्रिकेट में माइक प्रॉक्टर का प्रभाव


क्रिकेट की दुनिया में कुछ ऐसे खिलाड़ी होते हैं, जिनका अंतरराष्ट्रीय करियर भले ही छोटा हो, लेकिन उनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। माइक प्रॉक्टर भी ऐसे ही खिलाड़ियों में से एक हैं। दक्षिण अफ्रीका के इस ऑलराउंडर ने केवल 7 टेस्ट मैच खेले, लेकिन अपनी तेज गेंदबाजी और उपयोगी बल्लेबाजी से एक अलग पहचान बनाई। 1969-70 की सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनका प्रदर्शन विशेष रूप से याद किया जाता है। प्रॉक्टर ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी कई रिकॉर्ड बनाए, जो उन्हें महान खिलाड़ियों की श्रेणी में खड़ा करते हैं।


दिग्गज बनने का सफर

दक्षिण अफ्रीका पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध के कारण प्रॉक्टर का टेस्ट करियर आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने सात मैचों में 226 रन बनाए और 41 विकेट लिए। उनका गेंदबाजी औसत 15.02 रहा, और एक पारी में 6/73 उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। प्रॉक्टर तेज गेंदबाजी करते थे और 'रॉन्ग फुट' से गेंद डालना उनकी खास पहचान थी।


ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार प्रदर्शन

1969-70 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की सीरीज में प्रॉक्टर ने गेंद से कहर बरपाया। उन्होंने केवल 13.57 के औसत से 26 विकेट अपने नाम किए। दक्षिण अफ्रीका ने यह सीरीज 4-0 से जीतकर ऑस्ट्रेलिया को हराया था। इस ऐतिहासिक जीत में प्रॉक्टर की भूमिका महत्वपूर्ण रही। बल्ले से भी उनका खेल मजबूत था, और 1970-71 में लगातार छह फर्स्ट क्लास पारियों में शतक लगाकर उन्होंने एक खास रिकॉर्ड बनाया।


काउंटी क्रिकेट में प्रॉक्टर का जलवा

काउंटी क्रिकेट में प्रॉक्टर का जलवा लंबे समय तक बना रहा। उन्होंने काउंटी चैम्पियनशिप में तीन हैट्रिक लीं। 1977 में हैम्पशायर के खिलाफ बेन्सन और हेजेज कप सेमीफाइनल में भी उन्होंने हैट्रिक पूरी की। ग्लूस्टरशायर ने वह मैच जीता और बाद में खिताब भी हासिल किया। इस तरह प्रॉक्टर ने विभिन्न स्तरों पर अपनी गेंदबाजी की क्षमता साबित की।


क्रिकेट प्रशासन में योगदान

संन्यास के बाद प्रॉक्टर क्रिकेट प्रशासन और मैच रेफरी की भूमिका में भी सक्रिय रहे। 2006 के ओवल टेस्ट के बॉल टैम्परिंग मामले और 2007-08 सिडनी टेस्ट में हरभजन सिंह प्रकरण के दौरान वह मैच रेफरी थे। उन्होंने एंड्रयू साइमंड्स के साथ हुए विवाद के बाद हरभजन पर 3 मैचों का बैन लगाया था। हालांकि, बाद में अपील के बाद यह बैन हटा दिया गया और उन पर मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया। इसके बाद उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के कन्वीनर ऑफ सेलेक्टर की जिम्मेदारी भी संभाली। 17 फरवरी 2024 को डरबन में 77 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।