Newzfatafatlogo

युजवेंद्र चहल ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट से लिया संन्यास, वनडे और टी20 पर ध्यान केंद्रित करेंगे

भारतीय क्रिकेट के प्रमुख लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की है। उन्होंने यह निर्णय केवल रेड-बॉल फॉर्मेट के लिए लिया है, जबकि उनका ध्यान अब वनडे और टी20 क्रिकेट पर केंद्रित होगा। चहल ने अपने करियर में 49 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं और उन्होंने 148 विकेट लिए हैं। जानें उनके इस फैसले के पीछे की वजह और भविष्य की योजनाएं।
 | 

युजवेंद्र चहल का संन्यास


नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के प्रमुख लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने अपने संन्यास की घोषणा कर सभी को चौंका दिया है। यह निर्णय उन्होंने केवल रेड-बॉल क्रिकेट के लिए लिया है। शुक्रवार को उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट से तुरंत प्रभाव से संन्यास लेने का ऐलान किया। चहल का सपना भारतीय टेस्ट टीम में खेलने का अधूरा रह गया है।


चहल ने भारत की वनडे और टी20 टीम में खेला है, लेकिन टेस्ट टीम में उन्हें मौका नहीं मिला। उन्होंने अपना अंतिम फर्स्ट क्लास मैच लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में नॉर्थम्पटनशायर के लिए खेला। इस फैसले की जानकारी उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने कहा कि अब उनका ध्यान भारत की वनडे और टी20 टीम में वापसी पर होगा। चहल ने अपने करियर में 49 फर्स्ट क्लास मैच खेले और 32.27 की औसत से 148 विकेट लिए। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 25 रन देकर 6 विकेट लेना रहा।




 












View this post on Instagram
























 


A post shared by Yuzvendra Chahal (@yuzi_chahal23)




हाल ही में, चहल नॉर्थम्पटनशायर के लिए काउंटी क्रिकेट खेल रहे थे। लॉर्ड्स में मिडिलसेक्स के खिलाफ अपने अंतिम मैच में उन्होंने दो विकेट लिए। 36 वर्षीय चहल ने 2026-27 सीजन में काउंटी चैंपियनशिप के पांच मैचों में 21 विकेट लिए। उनका सबसे बेहतरीन प्रदर्शन डरहम के खिलाफ रहा, जहां उन्होंने कुल 9 विकेट लिए, जिसमें पहली पारी में पांच विकेट शामिल थे।


‘पहली क्रिकेट गेंद जो मैंने पकड़ी, वह लाल गेंद थी’


चहल ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि उन्होंने केवल 10 साल की उम्र में पहली बार क्रिकेट गेंद पकड़ी थी। उन्होंने कहा, "मेरी पहली क्रिकेट गेंद लाल थी। उस समय मुझे नहीं पता था कि मुझे इस खेल से कितना प्यार हो जाएगा। मेरे लिए रेड-बॉल क्रिकेट कभी भी सिर्फ एक और फॉर्मेट नहीं रहा। यहीं मैंने धैर्य, चरित्र, दृढ़ता और हर रन और हर विकेट के लिए लड़ने की खुशी का मतलब सीखा।"