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विराट कोहली: 37 साल की उम्र में भी क्रिकेट के मैदान पर ऊर्जा का प्रतीक

विराट कोहली, 37 साल की उम्र में भी, क्रिकेट के मैदान पर अपनी ऊर्जा और प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। पूर्व फील्डिंग कोच टी. दिलीप के अनुसार, कोहली की फील्डिंग केवल कैच लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी उपस्थिति और टीम को ऊर्जा देने की क्षमता भी महत्वपूर्ण है। जानें कैसे कोहली का प्रभाव अन्य खिलाड़ियों को प्रेरित करता है और 'बेस्ट फील्डर मेडल' ने टीम की सोच को कैसे बदला है।
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कोहली की फील्डिंग में ऊर्जा और प्रतिबद्धता


37 वर्ष की आयु में भी, विराट कोहली भारत के सबसे सक्रिय फील्डर्स में से एक माने जाते हैं। पूर्व फील्डिंग कोच टी. दिलीप के अनुसार, कोहली की असली ताकत केवल उनके कैच या डाइविंग में नहीं है, बल्कि उनका मैदान पर लगातार उपस्थित रहना और टीम को ऊर्जा प्रदान करना भी उनके योगदान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


कोहली की ऊर्जा का प्रभाव

इंग्लैंड दौरे पर वनडे टीम में वापसी करते हुए, विराट कोहली मैदान पर पहले की तरह सक्रिय दिखे। वह गेंद के पीछे दौड़ने, डाइव लगाने और हर गेंद पर ध्यान देने में पीछे नहीं हटे। दिलीप का मानना है कि कोहली की फील्डिंग की विशेषता उनकी निरंतर मेहनत और खेल को समझने की क्षमता है। आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने भारत के लिए सभी फॉर्मेट में 344 डिसमिसल किए हैं, जिसमें वनडे में 169 कैच शामिल हैं, जो किसी भारतीय फील्डर के लिए सबसे अधिक हैं।


कोहली का प्रभाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं

दिलीप के अनुसार, कोहली का प्रभाव तब भी स्पष्ट होता है जब गेंद उनके पास नहीं होती। उन्होंने बताया कि कोहली पावरप्ले से लेकर डेथ ओवर्स तक पूरी ऊर्जा के साथ मैदान पर सक्रिय रहते हैं। कवर और शॉर्ट मिड-विकेट जैसी जगहों पर उनकी तेज़ी और रिफ्लेक्स टीम के लिए बहुत फायदेमंद साबित होते हैं। दिलीप ने यह भी कहा कि कोहली के साथ फील्डिंग करते समय अन्य खिलाड़ी भी अपनी क्षमता से अधिक देने की कोशिश करते हैं, जिससे उनका जोश केवल उनके प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहता।


'बेस्ट फील्डर मेडल' का महत्व

टी. दिलीप ने भारत की टीम में 'बेस्ट फील्डर मेडल' की शुरुआत में भी योगदान दिया है। 2023 में शुरू किए गए इस पुरस्कार का उद्देश्य केवल शानदार कैच लेने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करना नहीं था, बल्कि मैदान पर हर छोटे योगदान को मान्यता देना भी था। इससे उन खिलाड़ियों को प्रेरणा मिली जो आमतौर पर ऐसे स्थानों पर नहीं होते जहां गेंद अधिक आती है। दिलीप के अनुसार, इस पहल ने टीम में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया और खिलाड़ियों ने एक-दूसरे के अच्छे प्रयासों का जश्न मनाना शुरू कर दिया। 2023 वनडे वर्ल्ड कप के दौरान यह मेडल ड्रेसिंग रूम की एक महत्वपूर्ण परंपरा बन गया।