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शीतल देवी ने एशियन पारा गेम्स 2026 में जीते दो स्वर्ण पदक

भारत की युवा तीरंदाज शीतल देवी ने एशियन पारा गेम्स 2026 में अद्वितीय प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने कंपाउंड मिक्स्ड टीम और व्यक्तिगत स्पर्धा में सफलता हासिल की। जानें कैसे उन्होंने बिना हाथों के तीरंदाजी की और अपनी तकनीक से सभी को प्रभावित किया। शीतल की कहानी प्रेरणादायक है, जिसमें उनकी मेहनत और लगन की झलक मिलती है।
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शीतल देवी की अद्भुत उपलब्धि

भारत की युवा तीरंदाज शीतल देवी ने एशियन पारा गेम्स 2026 में कुछ ही घंटों के भीतर दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं। 19 वर्षीय शीतल ने तोमन कुमार के साथ मिलकर कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता और इसके बाद व्यक्तिगत स्पर्धा में भी स्वर्ण पर निशाना साधा।


व्यक्तिगत स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन

बिना हाथों के जन्मी शीतल ने व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में सिंगापुर की अलीम नूर शाहिदा को 142-139 से हराया। अलीम ने शुरुआत में अच्छा प्रदर्शन करते हुए पहले दो सेट में 4 अंकों की बढ़त बना ली थी। लेकिन शीतल ने शानदार वापसी की और अगले दो सेट में लगातार 10-10 अंक प्राप्त किए। इस दौरान उन्होंने तीन एक्स भी लगाए, जिससे उन्होंने अंतिम सेट से पहले 2 अंकों की बढ़त बना ली।


शीतल के नाम तीन पदक

अंतिम सेट में शीतल ने 9-9 अंकों के साथ कुल 27 अंक प्राप्त किए, जबकि अलीम केवल 26 अंक ही बना सकीं। इस प्रकार, शीतल के नाम इस एशियन पारा गेम्स में तीन पदक हो गए हैं। उन्होंने ओडिशा की पायल नाग के साथ महिला डबल्स में भी रजत पदक जीता।


शीतल की तीरंदाजी की तकनीक

शीतल धनुष को सही स्थिति में रखने के लिए अपने पैरों का उपयोग करती हैं और डोरी को खींचने और छोड़ने के लिए अपने कंधे और जबड़े का सहारा लेती हैं। वह पेरिस पैरालंपिक 2024 में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं और मिक्स्ड टीम कंपाउंड स्पर्धा में मेडल जीतकर भारत की सबसे कम उम्र की पैरालंपिक मेडलिस्ट बनी थीं।