सचिन सिवाच ने 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता गोल्ड, अद्भुत वापसी की कहानी
नई दिल्ली में भारतीय बॉक्सिंग की चमक
नई दिल्ली: 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में ग्लासगो में भारतीय बॉक्सिंग के सितारे सचिन सिवाच ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर सभी को हैरान कर दिया। फाइनल में उनका मुकाबला नामीबिया के ट्राइअगेन मॉर्निंग न्डेवेलो से हुआ। यह मुकाबला आसान नहीं था, क्योंकि पहले राउंड में सचिन थोड़े पीछे नजर आए।
पहले तीन मिनट के बाद, 5 में से 3 जजों ने राउंड 10-9 से न्डेवेलो के पक्ष में दिया, जबकि केवल 2 जजों ने सचिन को समर्थन दिया। अब भारत की गोल्ड की उम्मीद अगले दो राउंड पर निर्भर थी।
दूसरे राउंड में बढ़ी चुनौतियाँ
दूसरा राउंड सचिन के लिए और भी कठिन साबित हुआ। इस राउंड में उनका एक पॉइंट कट गया, जिससे उनकी स्थिति और खराब हो गई। दूसरे राउंड के अंत तक, तीन जजों ने न्डेवेलो को 19-18 से आगे रखा, जबकि एक जज ने सचिन को 19-18 से आगे रखा।
पांचवे जज के स्कोरकार्ड पर पॉइंट कटने के बाद, नामीबियाई बॉक्सिंग 20-17 से आगे थी। ऐसा लग रहा था कि सचिन के हाथ से मैच निकल रहा है, और गोल्ड के लिए उन्हें अंतिम राउंड में कुछ असाधारण करना था।
आखिरी राउंड में अद्भुत वापसी
फिर वह क्षण आया जिसने मुकाबले की दिशा बदल दी। अंतिम राउंड में सचिन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। उन्होंने लगातार पंच मारे और अपनी रक्षा को मजबूत रखा। आखिरी मिनट में, सचिन ने न्डेवेलो को एक जोरदार पंच से नॉकडाउन कर दिया, जिससे रिंग में सन्नाटा छा गया।
अब निर्णय जजों के हाथ में था। रोमांच इतना था कि अंतिम सेकंड तक किसी को समझ नहीं आ रहा था। जब स्कोरकार्ड खोले गए, तो 5 में से 3 जजों ने सचिन के पक्ष में फैसला सुनाया। स्प्लिट डिसीजन 3-2 से सचिन सिवाच ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
सचिन की अद्वितीय जीत
"हार के मुंह से जीती बाजी"
दो राउंड में पिछड़ने, एक पॉइंट कटने और नॉकआउट के कगार पर पहुंचने के बाद वापसी करना आसान नहीं था। लेकिन 22 वर्षीय सचिन ने धैर्य और आक्रामकता का अद्भुत मिश्रण दिखाया।
उन्होंने साबित किया कि कॉमनवेल्थ के रिंग में अंतिम घंटी तक कुछ भी संभव है। यह जीत भारतीय बॉक्सिंग के लिए इस गेम्स की सबसे यादगार जीतों में से एक बन गई है।
सचिन की इस जीत के साथ भारत के खाते में बॉक्सिंग का एक और गोल्ड जुड़ गया। ग्लासगो में भारतीय मुक्केबाजों का प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है और सचिन की यह वापसी इसकी सबसे बड़ी मिसाल है।
