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सीमा कालीरामना ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज मेडल

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सीमा कालीरामना ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाया। मां बनने के बाद उन्होंने कठिनाइयों का सामना करते हुए खेल में वापसी की। उनकी कहानी मेहनत और हौसले की मिसाल है। जानें कैसे उन्होंने 58.65 मीटर का थ्रो कर मेडल जीता और भारत का नाम रोशन किया।
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सीमा कालीरामना का शानदार प्रदर्शन


ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सीमा कालीरामना ने अद्भुत प्रदर्शन करते हुए भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाया। बेटे के जन्म के बाद कठिनाइयों का सामना करते हुए उन्होंने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी की, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि मेहनत और हौसले के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।


मां बनने के बाद नया सफर

हरियाणा की 27 वर्षीय सीमा कालीरामना का यह मेडल केवल खेल की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह संघर्ष की एक प्रेरणादायक कहानी भी है। वह भिवानी की चौधरी बंसी लाल यूनिवर्सिटी से फिजिकल एजुकेशन में पीएचडी कर रही हैं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने खेल को भी जारी रखा। बेटे रुद्र के जन्म के महज 11 महीने बाद उन्होंने फिर से ट्रेनिंग शुरू की। इस दौरान उनके पति और पूर्व राष्ट्रीय डिस्कस थ्रो खिलाड़ी रविंदर ने उनके कोच का भी काम किया। वापसी आसान नहीं थी, लेकिन सीमा ने लगातार मेहनत की। 2025 के नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह बड़े मंच पर फिर से चमकने के लिए तैयार हैं।


58.65 मीटर का थ्रो

ग्लासगो में सीमा की शुरुआत अच्छी नहीं रही, पहले प्रयास में फाउल हुआ। दूसरी ओर, उनकी साथी खिलाड़ी निधि रानी ने शुरुआती राउंड में बढ़त बना ली थी, लेकिन सीमा ने दूसरे प्रयास में 57.32 मीटर का थ्रो किया और तीसरे प्रयास में 58.65 मीटर तक डिस्कस फेंककर ब्रॉन्ज मेडल की मजबूत दावेदारी पेश की। इसके बाद उनके बाकी तीन प्रयास फाउल रहे, जिससे उन्हें इंतजार करना पड़ा कि अन्य खिलाड़ी उनसे आगे निकलते हैं या नहीं। अंततः कोई भी उनके 58.65 मीटर के निशान को पार नहीं कर सका और भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो गया।


भारत के लिए यादगार उपलब्धि



महिलाओं के डिस्कस थ्रो फाइनल में भारत की दो खिलाड़ी मेडल की दौड़ में थीं। निधि रानी ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और 57.10 मीटर तक पहुंचीं, लेकिन वह चौथे स्थान पर रहीं। जमैका की सामंथा हॉल ने 61.66 मीटर के साथ गोल्ड और कनाडा की जूलिया टंक्स ने 60.67 मीटर के साथ सिल्वर मेडल जीता। सीमा के लिए यह ब्रॉन्ज़ मेडल केवल एक पदक नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष का फल है। मां बनने के बाद खेल में वापसी, पढ़ाई जारी रखना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतना उनके मजबूत इरादों की कहानी है।