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ऑस्ट्रेलिया में 150 साल पुराना कोयला लदा जहाज मिला, स्वच्छ ऊर्जा परियोजना के दौरान हुई खोज

ऑस्ट्रेलिया के गिप्सलैंड समुद्री क्षेत्र में एक स्वच्छ ऊर्जा परियोजना के दौरान 150 साल पुराना कोयला लदा जहाज 'सिटी ऑफ होबार्ट' खोजा गया है। यह जहाज 1877 में डूब गया था और इसकी खोज ने इतिहास को फिर से जीवित कर दिया है। विशेषज्ञों ने बताया कि यह खोज आधुनिक तकनीक की मदद से हुई है, जो न केवल इंजीनियरिंग परियोजनाओं में बल्कि पुरानी धरोहरों की खोज में भी महत्वपूर्ण है। जानें इस खोज के पीछे की कहानी और इसके महत्व के बारे में।
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समुद्र के रहस्यों से पर्दा उठाने वाली खोज


समुद्र में छिपे अनगिनत रहस्यों में से एक का खुलासा हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के समुद्र में हुआ है। यह खोज एक स्वच्छ ऊर्जा परियोजना के लिए किए गए समुद्री सर्वेक्षण के दौरान हुई, जिसमें वैज्ञानिकों ने 150 साल पुराना एक जहाज खोज निकाला है, जो कोयले का बड़ा लदान लेकर समुद्र में समा गया था।


150 साल पुराना जहाज 'सिटी ऑफ होबार्ट'

गिप्सलैंड समुद्री क्षेत्र में एक पुरानी जहाज की खोज ने इतिहास को फिर से जीवित कर दिया है। विशेषज्ञों ने एक पुरानी जहाज के मलबे की पहचान की, जो 1877 में रहस्यमय तरीके से डूब गया था। यह जहाज 'सिटी ऑफ होबार्ट' है, जिसका मलबा 150 वर्षों तक नहीं मिल पाया था।


स्वच्छ ऊर्जा परियोजना में मिली सफलता

स्पेन की ऊर्जा कंपनी इबरड्रोला ने गिप्सलैंड तट पर एक ऑफशोर विंड फार्म विकसित करने की योजना बनाई है। इस परियोजना के तहत समुद्र की तलहटी का विस्तृत सर्वेक्षण किया गया, जिसमें दो पुराने जहाजों के अवशेष मिले। इनमें से एक की पहचान 'सिटी ऑफ होबार्ट' के रूप में हुई।


615 टन कोयला लेकर निकला जहाज

'सिटी ऑफ होबार्ट' जुलाई 1877 में न्यूकैसल से मेलबर्न के लिए रवाना हुआ था, जिसमें लगभग 615 टन कोयला लदा था। यात्रा के दौरान जहाज का प्रोपेलर शाफ्ट टूट गया, जिससे पानी तेजी से भरने लगा और जहाज डूब गया।


चालक दल ने बचाई अपनी जान

जहाज के चालक दल ने लाइफबोट का सहारा लेकर समय रहते जहाज छोड़ दिया। सभी सदस्य सुरक्षित बच गए, लेकिन 'सिटी ऑफ होबार्ट' समुद्र की गहराइयों में समा गया।


60 मीटर गहराई में मिली खोज

विशेषज्ञों ने बताया कि जहाज का मलबा समुद्र की 60 मीटर गहराई में मिला। इसकी पुष्टि के लिए गोताखोरों की मदद ली गई, जिन्होंने जहाज की संरचना का अध्ययन किया।


आधुनिक तकनीक से मिली ऐतिहासिक खोज

इस परियोजना का उद्देश्य समुद्र की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन करना था, लेकिन इसी प्रक्रिया में एक ऐतिहासिक खोज सामने आई। यह घटना दिखाती है कि आधुनिक तकनीकें केवल इंजीनियरिंग परियोजनाओं तक सीमित नहीं हैं।


जहां कोयला था, अब बनेगी स्वच्छ ऊर्जा

जहां कभी कोयले से लदा जहाज डूबा था, वहीं अब हवा से बिजली बनाने की योजना पर काम चल रहा है। यह बदलाव ऊर्जा क्षेत्र में नई सोच को दर्शाता है।


तीन चरणों में विकसित होगा प्रोजेक्ट

'ऑरोरा ग्रीन' नाम की इस परियोजना को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा, जिसमें लगभग 150 बड़े विंड टर्बाइन लगाए जाएंगे।


ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संरक्षित

जहाज की पहचान के बाद 'सिटी ऑफ होबार्ट' को ऑस्ट्रेलिया के अंडरवॉटर कल्चरल हेरिटेज कानून के तहत संरक्षित किया गया है, ताकि भविष्य में शोधकर्ता इसका अध्ययन कर सकें।