फ्रांस में भारतीय महिला का अमेरिका और यूरोप के कामकाजी जीवन पर अनुभव
विदेश में नौकरी का सपना: अमेरिका बनाम यूरोप
नई दिल्ली: भारतीयों के लिए विदेश में नौकरी करने का सपना अक्सर अमेरिका और यूरोप के इर्द-गिर्द घूमता है। हालांकि, विदेश में जीवन केवल वेतन और नौकरी तक सीमित नहीं होता। फ्रांस में पिछले पांच वर्षों से कार्यरत भारतीय महिला मेहक ने इस विषय पर अपने अनुभव साझा किए हैं। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अमेरिका और यूरोप के बीच अपने अनुभवों के आधार पर तुलना की है।
मेहक ने बताया कि विदेश जाने से पहले यह जानना जरूरी है कि वहां जाने का असली उद्देश्य क्या है। उन्होंने अमेरिका को अधिक आय के लक्ष्य से जोड़ा, जबकि यूरोप में काम और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन को प्राथमिकता दी। उन्होंने यूरोप में उच्च करों और शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, दोनों स्थानों का अनुभव व्यक्ति की प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है।
यूरोप में कामकाजी संस्कृति का अनुभव
मेहक ने यूरोप की जिंदगी को लेकर क्या कहा?
इंस्टाग्राम पर @mehaik_infrance हैंडल से साझा किए गए वीडियो में मेहक ने यूरोप में कामकाजी संस्कृति का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि यहां लोग अपने शौक और खेल के लिए भी समय निकालते हैं। उनके अनुसार, सप्ताहांत निजी जीवन के लिए होता है और काम से जुड़े संदेशों का दबाव कम होता है। उन्होंने वर्क-लाइफ बैलेंस को यूरोप की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
यूरोप में टैक्स और सुविधाएं
यूरोप में टैक्स ज्यादा, लेकिन सुविधाएं भी
मेहक के अनुसार, यूरोप में आने वाले लोगों को केवल अधिक आय की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि यूरोपीय देशों में कर दरें काफी ऊंची हो सकती हैं, क्योंकि वहां की व्यवस्था अलग तरीके से काम करती है। उनके अनुसार, स्कूल मुफ्त हैं, स्वास्थ्य सेवाएं लगभग मुफ्त हैं और कई जगह विश्वविद्यालय की पढ़ाई सस्ती या मुफ्त हो सकती है। इसलिए, कमाई के साथ मिलने वाली सुविधाओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।
अमेरिका में आय के अवसर
अमेरिका में ज्यादा कमाई का विकल्प
अमेरिका की तुलना में मेहक ने कहा कि यदि किसी का मुख्य लक्ष्य अधिकतम आय अर्जित करना है, तो अमेरिका एक बेहतर विकल्प हो सकता है। उन्होंने वहां अपेक्षाकृत अधिक वेतन और कम करों का उल्लेख किया। हालांकि, उनके अनुसार, वहां कई सेवाओं के लिए खुद भुगतान करना पड़ता है और काम के घंटे भी अधिक हो सकते हैं। उन्होंने सप्ताह में लगभग 60 घंटे काम करने की स्थिति का भी उल्लेख किया।
विदेश जाने से पहले क्या विचार करें?
आखिर विदेश जाने से पहले क्या सोचें?
मेहक ने अपनी स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि फ्रांस में उनकी क्रय शक्ति भारत की तुलना में अधिक है। उन्होंने विदेश जाने को अनुभव और एक्सपोजर से जोड़ते हुए कहा कि पहले अपना उद्देश्य स्पष्ट करना चाहिए। उनकी पोस्ट पर कई यूजर्स ने भी प्रतिक्रिया दी और माना कि सही विकल्प व्यक्ति की प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अधिक वेतन हमेशा बेहतर जीवन का संकेत नहीं होता।
