ईरान पर अमेरिका की नई वित्तीय नकेल: क्या हैं इसके प्रभाव?
नई दिल्ली में अमेरिका की वित्तीय रणनीति
नई दिल्ली: ट्रंप प्रशासन ने ईरान को वैश्विक आर्थिक प्रणाली से अलग करने के लिए अपनी वित्तीय नीतियों को सख्त करना शुरू कर दिया है। इस सप्ताह, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरान से जुड़े लेनदेन में शामिल एक और अंतरराष्ट्रीय बैंक पर कड़े प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि वाशिंगटन हर हफ्ते ईरान पर नए द्वितीयक प्रतिबंध लगाएगा, जो प्रमुख बैंकिंग संस्थानों से शुरू होगा।
ईरान के सहयोगियों पर दबाव
अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे ईरान के साथ व्यापार बंद करें, अन्यथा उन्हें अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से बाहर होने के गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।
इस रणनीति के तहत, विभाग ने मिस्र के दूसरे सबसे बड़े बैंक 'बैंके मिस्र' की संयुक्त अरब अमीरात स्थित शाखाओं की अमेरिकी वित्तीय प्रणाली तक पहुंच को समाप्त करने के लिए एक नियम का प्रस्ताव रखा है।
जी-20 सम्मेलन से पहले अमेरिका की चेतावनी
जी-20 सम्मेलन से पहले अमेरिका की दोटूक चेतावनी
नॉर्थ कैरोलिना के अश्विले में होने वाले जी-20 देशों के सम्मेलन से पहले, ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने वैश्विक वित्तीय तंत्र को एक स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका प्रमुख और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ बातचीत करेगा। इस दौरान अन्य देशों को ईरान के साथ वित्तीय संबंध समाप्त करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। बेसेंट ने चेतावनी दी कि यदि आवश्यक हुआ, तो कड़ी वित्तीय कार्रवाई की जाएगी।
भारत-चीन जैसे साझेदारों पर कूटनीतिक दृष्टिकोण
भारत-चीन जैसे व्यापारिक साझेदारों पर कूटनीतिक रुख
मिस्र के बैंक पर सीधे प्रतिबंध लगाने के बजाय, अमेरिकी प्रशासन ने उनकी अमेरिकी तंत्र तक पहुंच को सीमित करने का निर्णय लिया है, जो यह दर्शाता है कि वे चीन और भारत जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों पर सीधे कार्रवाई करने में सतर्क हैं। हालांकि, बेसेंट इस सप्ताह जी-20 बैठकों के दौरान चीन और भारत के वित्त अधिकारियों से मिलने वाले हैं। उन्होंने कहा कि बीजिंग द्वारा ईरान से कच्चा तेल खरीदने के मामले में सभी दंडात्मक विकल्प खुले हैं। अमेरिका इस सम्मेलन के माध्यम से वैश्विक शक्तियों को एकजुट करके तेहरान की वित्तीय जीवनरेखा को स्थायी रूप से काटने की कोशिश कर रहा है।
