11 सितंबर: कैसे फ्लाइट 93 ने आतंकियों के मंसूबों को नाकाम किया?
11 सितंबर के हमले की भयावहता
नई दिल्ली: 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए आतंकवादी हमलों ने वैश्विक स्तर पर एक गहरा प्रभाव डाला। अलकायदा के आतंकवादियों ने चार वाणिज्यिक विमानों का अपहरण कर उन्हें हमले के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। इनमें से दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराए, जबकि तीसरा विमान पेंटागन में जा घुसा। चौथा विमान, यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 93, अपने निर्धारित मार्ग से भटककर वॉशिंगटन की ओर बढ़ रहा था।
फ्लाइट 93 की उड़ान और देरी
फ्लाइट 93 ने 11 सितंबर की सुबह न्यू जर्सी के नेवार्क एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। 9/11 कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, एयरपोर्ट पर भीड़ के कारण विमान को लगभग 25 से 40 मिनट की देरी का सामना करना पड़ा। इस देरी ने यात्रियों को जमीन पर हो रहे हमलों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर दिया।
फोन कॉल से आतंकियों की योजना का खुलासा
विमान में सवार यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने अपने परिवारों से फोन पर संपर्क किया। बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि अन्य हाईजैक किए गए विमानों का उपयोग आत्मघाती हमलों में किया गया है। इससे यात्रियों को यह समझ में आया कि फ्लाइट 93 भी किसी महत्वपूर्ण अमेरिकी स्थान को निशाना बना सकती है।
यात्रियों का साहसिक निर्णय
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, यात्रियों ने आतंकियों का सामना करने का निर्णय लिया। उन्होंने आपस में चर्चा कर कॉकपिट में घुसने की योजना बनाई। टॉड बीमर ने अपने साथियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा, “लेट्स रोल।” इसके बाद कई यात्री कॉकपिट की ओर बढ़े। जांच में यह सामने आया कि यात्रियों ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने के लिए खाने की ट्रॉली का सहारा लिया। आतंकियों ने विमान को तेजी से मोड़कर और ऊपर-नीचे करके उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन यात्री पीछे नहीं हटे।
अंतिम क्षण और परिणाम
आखिरकार, आतंकियों ने विमान को पेंसिल्वेनिया के शैंक्सविले के पास एक खेत में गिरा दिया। यह हादसा सुबह करीब 10:03 बजे हुआ, जिसमें विमान में सवार सभी 40 लोग मारे गए। हालांकि, यात्रियों के साहस ने विमान को अपने संभावित लक्ष्य तक पहुँचने से रोक दिया और अमेरिका पर एक और बड़े हमले को टाल दिया।
