अमेरिका में भारतीय लैब मालिक पर 550 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप
अमेरिका में धोखाधड़ी का मामला
अमेरिका में एक गंभीर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें भारतीय मूल के एक लैब के मालिक पर कोरोना महामारी के दौरान लगभग 66.2 मिलियन डॉलर, यानी करीब 550 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, आरोपी ने बिना किसी जांच के 3.8 लाख से अधिक लोगों की कोविड-19 रिपोर्ट तैयार की और इस दौरान सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये वसूल किए।
आरोपी की पहचान
राजेश पटेल, जो इलिनॉय के हिलाइड में एक क्लिनिकल लैब के सह-मालिक और मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) हैं, ने मई 2021 से अप्रैल 2022 के बीच फर्जी बिल प्रस्तुत किए। इन बिलों के माध्यम से सरकार से पैसे वसूले गए।
मामले का विवरण
राजेश पटेल ने 2021 से 2022 के बीच अमेरिका में चल रहे 'अनइंस्योर्ड प्रोग्राम' के तहत कई फर्जी बिल प्रस्तुत किए। यह योजना उन लोगों के लिए थी जिनके पास स्वास्थ्य बीमा नहीं था, ताकि महामारी के दौरान उनका मुफ्त इलाज और परीक्षण किया जा सके।
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राजेश की लैब ने कोरोना के PCR टेस्ट किए। मार्च 2021 में, उनकी लैब ने 'मेरिडियन मेडिकल स्टाफिंग' नामक कंपनी के साथ एक समझौता किया, जिसमें लैब ने कंपनी को करोड़ों रुपये दिए ताकि वह मरीजों के टेस्ट सैंपल और जानकारी जुटा सके। जांच में यह पाया गया कि इनमें से अधिकांश मरीज या तो असली नहीं थे या उन्होंने कभी सैंपल नहीं दिया। इसके बावजूद, राजेश की लैब ने बिना सैंपल की जांच किए 3.8 लाख से अधिक फर्जी नेगेटिव रिपोर्ट तैयार की।
सरकारी खजाने को नुकसान
राजेश की लैब ने इस योजना के तहत लगभग 66.2 मिलियन डॉलर के फर्जी बिल प्रस्तुत किए, जिनमें से सरकार ने लगभग 365 करोड़ रुपये का भुगतान किया। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे मामले में उन्होंने अकेले करीब 232 करोड़ रुपये अपने निजी खाते में स्थानांतरित कर लिए।
धोखाधड़ी की गंभीरता
इस मामले की जांच कर रही अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी FBI और न्याय विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। न्याय विभाग के अधिकारी कॉलिन एम मैकडॉनल्ड ने कहा कि आरोपी ने वैश्विक महामारी के संकट का फायदा उठाकर जनता के टैक्स का पैसा लूटा। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य मामलों में इस प्रकार की धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि अमेरिका में स्वास्थ्य योजनाओं में धोखाधड़ी को रोकने के लिए 2007 से अब तक 6,200 से अधिक मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है, जिनमें अरबों डॉलर के फर्जीवाड़े शामिल हैं।
