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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस और ईरान पर नए कानून पर हस्ताक्षर किए

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने का अधिकार प्राप्त हुआ है। इस कानून का सबसे अधिक प्रभाव भारत और चीन पर पड़ेगा, जो रूस के बड़े खरीदार हैं। जानें इस कानून के पीछे की कहानी, प्रभावित देशों की सूची, और भारत के लिए बढ़ते खतरे के बारे में।
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नए कानून का विवरण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया है। व्हाइट हाउस ने इसकी पुष्टि की है। यह कानून अमेरिकी प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित होने के दो दिन बाद लागू हुआ है। इस नए कानून के तहत राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से सबसे अधिक तेल और गैस खरीदने वाले पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार प्राप्त हुआ है, जिसमें भारत भी शामिल है.


कानून की पृष्ठभूमि

यह कानून लगभग 18 महीने की राजनीतिक प्रक्रिया का परिणाम है, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2025 में हुई थी। सीनेटर लिंडसे ग्राहम और रिचर्ड ब्लूमेंथल ने अमेरिकी सीनेट में इसका पहला मसौदा पेश किया था। इन दोनों का उद्देश्य रूस की ऊर्जा निर्यात से होने वाली आय को प्रभावित करना और मॉस्को को यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत की मेज पर लाना था, जो चार साल से अधिक समय से चल रहा है.


प्रभावित देशों की सूची

इस कानून का सबसे अधिक प्रभाव चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया पर पड़ेगा, जो रूस के तेल के बड़े खरीदार हैं। भारत और चीन पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव अधिक होगा.


किस पर असर होगा?

इस बिल में किसी विशेष देश का नाम नहीं लिया गया है। इसके बजाय, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को विदेश मंत्री और ऊर्जा मंत्री के परामर्श से यह तय करने का कार्य सौंपा गया है कि पिछले 12 महीनों में रूस से सबसे अधिक कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले पांच देश कौन से हैं। यह सूची हर 180 दिन में अपडेट की जाएगी.


कानून के सूत्रधार

सीनेटर ब्लूमेंथल ने भारत और चीन से रूसी ऊर्जा की खरीद रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इन देशों को अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाना होगा और उन्हें तेल-गैस अन्य स्रोतों से खरीदना चाहिए.


यूरोपीय सहयोगियों को राहत

इस कानून में अमेरिका के यूरोपीय सहयोगी देशों को राहत देने का भी प्रावधान है। जिन देशों का रूसी प्राकृतिक गैस आयात, रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम है, उन्हें इस कानून से छूट दी जाएगी.


रूस पर टैरिफ का प्रावधान

कानून के एक अन्य प्रावधान के तहत, रूस से सीधे आयात होने वाले सामान पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार भी दिया गया है. राष्ट्रपति को यह अधिकार भी है कि वे किसी भी देश को टैरिफ से छूट दे सकते हैं, बशर्ते वह संसद में यह प्रमाणित करें कि यह छूट अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है.


टैरिफ हटाने की प्रक्रिया

किसी देश पर टैरिफ को स्थायी रूप से हटाने के लिए राष्ट्रपति को यह प्रमाणित करना होगा कि उस देश ने रूसी ऊर्जा खरीदना पूरी तरह बंद कर दिया है और भरोसेमंद आश्वासन दिया है कि वह दोबारा ऐसा नहीं करेगा.


भारत के लिए बढ़ता खतरा

रूसी कच्चे तेल के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक है, और अब भारत इस कानून के दायरे में आ गया है। यदि ट्रंप चाहें, तो वे भारत से अमेरिका आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकते हैं, जिससे भारत का अमेरिका को होने वाला निर्यात महंगा और प्रतिस्पर्धा में कमजोर हो सकता है. हालांकि, राहत की बात यह है कि यह टैरिफ अनिवार्य नहीं है और राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर है.