डोनाल्ड ट्रंप का ईरान के साथ शांति वार्ता का नया मोड़
शांति वार्ता का अंतिम चरण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ शांति वार्ता अपने अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। हालांकि, यह बात चौंकाने वाली है कि ट्रंप ने शांति की बात करते हुए युद्ध का भी संकेत दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरान अमेरिका के साथ अंतिम परमाणु समझौता नहीं करता, तो तेहरान उनके निशाने पर होगा, जिससे अमेरिकी सेना शांति वार्ता को तोड़ने और हमले शुरू करने के लिए मजबूर हो जाएगी.
ट्रंप का मध्य पूर्व में गार्जियन बनने का दावा
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका, मध्य पूर्व का 'गार्जियन' बनेगा और क्षेत्र की 20 प्रतिशत कमाई 'डकार' लेगा। वह हर इंटरव्यू और सोशल मीडिया पोस्ट में शांति और युद्ध की बातें एक साथ कर रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि 2026 का यह समझौता, 2015 के ओबामा के समझौते से बेहतर होगा, जिसमें ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया था.
समझौते की शर्तें
- ईरान न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न खरीदेगा।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान कोई टैक्स नहीं लेगा।
- संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंपेगा।
परमाणु हथियारों का असमान वितरण
अमेरिका के पास घोषित रूप से परमाणु बम हैं, जबकि इजरायल के पास भी ऐसे हथियार होने की संभावना है। इजरायल को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से चिंता है, जबकि ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। ईरान पर हमले की घटनाएँ भी हुई हैं, जैसे कि 13 जून 2025 को इजरायल ने ईरान पर हमला किया था, जो 24 दिनों तक चला.
परमाणु हथियारों के उन्मूलन की आवश्यकता
हिरोशिमा और नागासाकी पर अमेरिका के हमले के बाद से परमाणु हथियारों के उन्मूलन की आवश्यकता महसूस की गई। 24 जनवरी 1946 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन की मांग की थी।
जन आंदोलन का उदय
1950 के दशक में परमाणु हथियारों के खिलाफ जन आंदोलन तेज हुआ। मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन और दार्शनिक बर्ट्रेंड रसेल ने परमाणु हथियारों के उन्मूलन की अपील की।
क्यूबा संकट और उसके परिणाम
1960 में क्यूबा संकट के दौरान, अमेरिका और रूस के बीच तनाव बढ़ गया। इसके बाद, 1963 में पार्शियल टेस्ट बैन ट्रिटी पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाई गई।
NPT और उसके प्रभाव
1970 में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना था। हालांकि, यह संधि भेदभावपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि केवल कुछ देशों को परमाणु हथियार रखने की अनुमति है।
भारत की स्थिति
भारत एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है और स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के अनुसार, यह दुनिया का छठा सबसे ताकतवर परमाणु देश है। भारत ने 1974 में पहला परमाणु परीक्षण किया था, जिससे दुनिया चौंक गई थी।
दक्षिण अफ्रीका का उदाहरण
दक्षिण अफ्रीका ने अपने परमाणु हथियारों को नष्ट कर दिया और नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) में शामिल हुआ। इससे देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली और आर्थिक विकास में मदद मिली।
बेलारूस और कजाकिस्तान का अनुभव
बेलारूस और कजाकिस्तान ने भी अपने परमाणु हथियारों को रूस को सौंपा और इसके बदले में सुरक्षा गारंटी प्राप्त की।
यूक्रेन का मामला
यूक्रेन ने भी अपने परमाणु हथियारों को छोड़ दिया, लेकिन बाद में उसे रूस के आक्रमण का सामना करना पड़ा।
NPT की समीक्षा
2022 में NPT की 10वीं समीक्षा बैठक हुई, जिसमें रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण नई चुनौतियाँ सामने आईं।
