Barack Obama की AI पर चिंता: क्या भविष्य में खुद से सीखेगा AI?
AI पर वैश्विक बहस
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विषय पर आजकल पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। कुछ इसे भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण तकनीक मानते हैं, जबकि अन्य इसके प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। इस संदर्भ में, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी अपनी चिंताओं को साझा किया है। उनका कहना है कि भले ही AI कंपनियों की बाजार मूल्य में कुछ हद तक बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि AI तकनीक खुद भी अतिरंजित है।
ओबामा का AI कमीशन
ओबामा ने बताया कि जब वे राष्ट्रपति थे, तब 2015-16 में उनकी सरकार ने AI के सामाजिक, आर्थिक और नैतिक प्रभावों को समझने के लिए एक विशेष कमीशन का गठन किया था। इस कमीशन ने उस समय AI पर एक विस्तृत रिपोर्ट भी तैयार की थी। हालांकि, ओबामा के अनुसार, उनकी सरकार के बाद आई सरकार ने इस रिपोर्ट को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं दिखाई, जिससे उठे सवाल अब और भी गंभीर हो गए हैं।
AI की खुद से सीखने की क्षमता
AI की लर्निंग में बदलाव
AI के तेजी से विकास का एक मुख्य कारण रिकर्सिव लर्निंग है, यानी खुद से सीखने की क्षमता। सरल शब्दों में, AI अब केवल इंसानों की ट्रेनिंग पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह स्वयं नई चीजें सीखने लगा है। ओबामा के अनुसार, कुछ समय पहले तक AI मॉडल्स की लर्निंग में लगभग 90% हिस्सा इंसानी इनपुट पर निर्भर था, लेकिन हाल के महीनों में यह अनुपात लगभग 50-50 हो गया है। इसका मतलब है कि AI के विकास में इंसानी ट्रेनिंग के साथ-साथ उसकी खुद से सीखने की क्षमता भी महत्वपूर्ण हो गई है।
भविष्य में AI की लर्निंग
क्या AI 90% खुद सीखेगा?
ओबामा का मानना है कि भविष्य में AI की लर्निंग में लगभग 90% हिस्सा सेल्फ-लर्निंग का हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो AI के विकास की गति आज की तुलना में कहीं अधिक तेज हो सकती है। उन्होंने इस विकास को हॉकी स्टिक जैसी वृद्धि के रूप में वर्णित किया, जिसमें शुरुआत में विकास धीमा होता है, लेकिन एक विशेष चरण के बाद यह तेजी से बढ़ता है।
AI के खतरों पर ओबामा की राय
किलर रोबोट्स से असली खतरा क्या है?
जब भी AI के खतरों की चर्चा होती है, तो किलर रोबोट्स और इंसानों को खत्म करने वाली मशीनों का जिक्र सबसे पहले होता है। ओबामा के अनुसार, इस तरह के खतरे को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता, लेकिन इसकी संभावना वर्तमान में काफी कम है। उनकी असली चिंता AI मिसअलाइनमेंट के बारे में है, यानी ऐसी स्थिति जिसमें AI सिस्टम अपने लिए ऐसे लक्ष्य निर्धारित कर ले, जो इंसानों की इच्छाओं से भिन्न हों।
यह जरूरी नहीं है कि AI सोच-समझ सके या इंसानों से नफरत करे। यदि AI अपने निर्णय लेने लगे और उसके लक्ष्य इंसानों के लक्ष्यों से भिन्न हो जाएं, तो यह एक गंभीर समस्या बन सकती है। यही कारण है कि AI के तेजी से विकास के साथ यह सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है कि इसे इंसानों के नियंत्रण और लक्ष्यों के साथ कैसे जोड़ा जाए।
