BRICS शिखर सम्मेलन 2026: आतंकवाद, व्यापार और पर्यावरण पर महत्वपूर्ण निर्णय
दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन का समापन
नई दिल्ली: दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का समापन कई महत्वपूर्ण निर्णयों और साझा प्रतिबद्धताओं के साथ हुआ। तीन दिनों तक चली चर्चा के बाद जारी दिल्ली घोषणा पत्र में आतंकवाद, वैश्विक व्यापार, पर्यावरण और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों ने अपने विचार साझा किए। BRICS में दुनिया की बड़ी जनसंख्या और वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शामिल है, इसलिए सम्मेलन के निर्णयों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम
घोषणा पत्र में आतंकवाद को प्राथमिकता दी गई है। इसमें पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए आतंकवाद और उसकी फंडिंग के खिलाफ कठोर कदम उठाने की आवश्यकता पर सहमति बनी। सदस्य देशों ने आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने और इसके नेटवर्क को कमजोर करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
युद्ध और समुद्री मार्गों पर चर्चा
BRICS देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे सैन्य संघर्षों के बीच एकतरफा सैन्य कार्रवाई और बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की। घोषणा पत्र में वाणिज्यिक समुद्री मार्गों से जुड़े विवादों को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाने की बात कही गई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते संघर्षों के बीच इसे आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
व्यापार और वैश्विक मूल्य श्रृंखला पर जोर
BRICS देशों ने 2026 से 2030 की अवधि के लिए वैश्विक मूल्य श्रृंखला में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच बाजारों तक पहुंच को सरल बनाना और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना है। घोषणा पत्र में अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बिना उचित विचार के एकतरफा टैरिफ लगाने पर भी चिंता व्यक्त की गई।
पर्यावरण के लिए सैटेलाइट सहयोग
पर्यावरणीय चुनौतियों और प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी को मजबूत करने के लिए BRICS ने रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन सहयोग समझौते को मंजूरी दी। इसके माध्यम से सदस्य देश अंतरिक्ष आधारित तकनीक और डेटा का उपयोग साझा उद्देश्यों के लिए कर सकेंगे।
UNSC सुधार की आवश्यकता
BRICS देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना में सुधार की आवश्यकता पर फिर से जोर दिया। घोषणा पत्र में वैश्विक दक्षिण के देशों की भागीदारी बढ़ाने की मांग की गई। दिल्ली सम्मेलन की विशेषता यह रही कि विभिन्न वैश्विक संकटों का सामना कर रहे देशों के नेता एक मंच पर सहयोग और स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमत हुए।
