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कनाडा का बदलता रुख: खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ सख्त कदम

कनाडा का दृष्टिकोण भारत के प्रति बदल रहा है, खासकर खालिस्तान समर्थकों के मामले में। जस्टिन ट्रुडो की विदाई के बाद, कनाडाई सरकार ने पहली बार खालिस्तान समर्थकों की भूमिका को स्वीकार किया है, जो 1985 के विमान धमाके में शामिल थे। इस घटना को कनाडा के इतिहास का सबसे गंभीर आतंकवादी हमला माना गया है। जानें कैसे सीएसआईएस ने इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट की और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
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कनाडा का नया दृष्टिकोण

जस्टिन ट्रुडो के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद, कनाडा का भारत के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले खालिस्तान समर्थकों का समर्थन करने वाली कनाडाई सरकार अब उनके खिलाफ खुलकर बोलने लगी है। इसका एक उदाहरण कनिष्क विमान हादसे की बरसी पर देखने को मिला।


खालिस्तान समर्थकों की भूमिका का स्वीकार

41 वर्षों के बाद, कनाडा ने पहली बार इस बात को स्वीकार किया है कि खालिस्तान समर्थक विमान धमाके में शामिल थे, जबकि पहले सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रही। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस घटना को कनाडा के इतिहास का सबसे गंभीर आतंकवादी हमला बताया।


कनाडा का सबसे बड़ा आतंकवादी हमला

कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) ने अपने फेसबुक पेज पर एक विस्तृत पोस्ट साझा किया, जिसमें इस विमान धमाके को कनाडा का सबसे भयानक आतंकवादी हमला बताया गया। एजेंसी ने कहा कि खालिस्तान समर्थकों ने विमान में बम लगाया था।


सीएसआईएस का बयान

कनाडा का बदलता रुख: खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ सख्त कदम


सीएसआईएस ने अपने पोस्ट में लिखा, 'आतंकवाद के पीड़ितों की याद में मनाए जाने वाले इस राष्ट्रीय दिवस पर, हम एयर इंडिया की फ्लाइट 182 में मारे गए 329 लोगों को याद करते हैं, जिनकी जान एक भयानक आतंकवादी हमले में गई थी।'


खालिस्तानी चरमपंथियों की जिम्मेदारी

एजेंसी ने आगे कहा, '23 जून 1985 को कनाडा में रहने वाले खालिस्तानी चरमपंथियों ने बम लगाकर विमान को नष्ट कर दिया था। इस हमले में सभी सवारों की मौत हो गई थी, जिनमें से अधिकांश कनाडाई नागरिक थे। यह कनाडा का सबसे घातक आतंकवादी हमला था।'


नागरिकों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता

सीएसआईएस ने कहा, 'यह घटना हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। उस समय सीएसआईएस का गठन हुए एक साल से भी कम समय हुआ था। इस त्रासदी ने हमारे विकास को एक नई दिशा दी। पिछले चार दशकों से हम कनाडाई लोगों को राजनीतिक, धार्मिक और विचारधारा से प्रेरित हिंसा से बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'


कनिष्क विमान में धमाका

एयर इंडिया की फ्लाइट 182, जिसे कनिष्क के नाम से जाना जाता है, में 23 जून 1985 को आयरलैंड के तट के पास एक बड़ा धमाका हुआ। यह विमान लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर पहुंचने वाला था, लेकिन इससे पहले ही यह आतंकवादी हमले का शिकार हो गया। इस घटना में सभी 329 लोगों की जान गई, जिनमें अधिकांश भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे। यह विमान मॉन्ट्रियल से उड़ान भरकर लंदन होते हुए नई दिल्ली जाने वाला था।