Donald Trump का पनामा नहर पर विवादित बयान: क्या चीन का बढ़ता प्रभाव अमेरिका के लिए खतरा है?
ट्रंप का बयान और पनामा नहर का मुद्दा
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने बयानों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। नॉर्थ डकोटा के मेडोरा में 'थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी' के उद्घाटन समारोह में, ट्रंप ने पनामा नहर पर अमेरिकी नियंत्रण छोड़ने के निर्णय को 'बड़ी बेवकूफी' बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि चीन इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जिसे अमेरिका किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं करेगा।
पनामा नहर पर ट्रंप की तीखी आलोचना
ट्रंप ने पनामा नहर के संबंध में 1977 की 'टोर्रिजोस-कार्टर संधि' की कड़ी आलोचना की, जिसके तहत अमेरिका ने 1999 में नहर का नियंत्रण पनामा को सौंप दिया था। उन्होंने कहा, 'हमने पनामा नहर को दूसरों के हाथों में सौंप दिया। नियंत्रण मिलने के बाद उन्होंने सबसे पहले ट्रांजिट फीस को चार गुना बढ़ा दिया, फिर भी उनके जहाजों की संख्या में कोई कमी नहीं आई।'
चीन की चालबाजी पर चेतावनी
ट्रंप ने आगे कहा कि चीन अब इस नहर पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिका ऐसा कभी नहीं होने देगा। उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने कई बार कीमतें बढ़ाकर बेहिसाब मुनाफा कमाया।
बर्थराइट सिटीजनशिप पर ट्रंप की असहमति
इसके अलावा, ट्रंप ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'बर्थराइट सिटीजनशिप' पर हालिया फैसले पर असंतोष व्यक्त किया। उनका मानना है कि अदालत ने इस मामले को सही तरीके से नहीं समझा। उन्होंने कहा कि यह कानून गृहयुद्ध के बाद केवल पूर्व गुलामों के बच्चों को सुरक्षा देने के लिए बनाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना
हालांकि, ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले की प्रशंसा की, जिसमें राष्ट्रपति को कार्यकारी शाखा की एजेंसियों के प्रमुखों को हटाने का अधिकार दिया गया है। ट्रंप ने इसे राष्ट्रपति पद की एक बड़ी जीत बताया और कहा कि यह 91 साल पुराने कानूनी गतिरोध को समाप्त करता है। उन्होंने कहा कि यह फैसला कार्यपालिका को मजबूत बनाएगा, खासकर जब राष्ट्रपति को वास्तविक शक्ति की आवश्यकता है।
