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Donald Trump का बर्थराइट नागरिकता पर नया आदेश: क्या है इसका प्रभाव?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बर्थराइट नागरिकता और बर्थ टूरिज्म पर नए कार्यकारी आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों का उद्देश्य उन मामलों को सीमित करना है जहां अमेरिका में जन्मे बच्चों को स्वचालित नागरिकता मिलती है। ट्रंप का प्रशासन इस व्यवस्था में बदलाव की कोशिश कर रहा है, जबकि नागरिक अधिकार संगठनों ने इन आदेशों को संविधान के खिलाफ बताया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो सकता है आगे।
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ट्रंप का सख्त रुख


नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बर्थराइट नागरिकता और बर्थ टूरिज्म के मुद्दे पर एक बार फिर कठोर कदम उठाए हैं। हाल ही में, ट्रंप ने इस विषय से संबंधित दो नए कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए। व्हाइट हाउस के अनुसार, इन आदेशों का मुख्य उद्देश्य उन मामलों को सीमित करना है, जहां अमेरिका में जन्मे बच्चों को स्वचालित रूप से अमेरिकी नागरिकता का दावा किया जाता है।


बर्थराइट नागरिकता की परिभाषा

अमेरिका में बर्थराइट नागरिकता का तात्पर्य उस प्रणाली से है, जिसके तहत देश की भूमि पर जन्म लेने वाले बच्चे को सामान्यतः अमेरिकी नागरिक माना जाता है। यह अधिकार अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की नागरिकता से संबंधित धारा से जुड़ा हुआ है।


ट्रंप इस व्यवस्था में बदलाव लाने की कोशिशों में लगे हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि मौजूदा नियमों का कुछ मामलों में दुरुपयोग किया जा रहा है। नए आदेशों में विशेष रूप से उन परिस्थितियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जहां बच्चे के माता-पिता अमेरिकी नागरिक नहीं हैं और उनकी स्थिति अमेरिका में अस्थायी या अनधिकृत है।


बर्थ टूरिज्म पर कार्रवाई

ट्रंप के नए आदेशों में बर्थ टूरिज्म पर भी सख्ती की गई है। बर्थ टूरिज्म उस स्थिति को दर्शाता है, जब विदेशी महिलाएं बच्चे को जन्म देने के लिए अमेरिका आती हैं, ताकि उनके बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिल सके।


अमेरिकी प्रशासन इस प्रथा को रोकने के लिए लंबे समय से प्रयासरत है। 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भी ऐसे नियम लागू किए गए थे, जिनके तहत यदि कोई व्यक्ति मुख्य रूप से बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से टूरिस्ट या बिजनेस वीजा का उपयोग करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।


कानूनी चुनौती की संभावना

ट्रंप के नए निर्णय पर विवाद बढ़ने की संभावना है। नागरिक अधिकार संगठनों का मानना है कि बर्थराइट नागरिकता को सीमित करने का प्रयास संविधान के 14वें संशोधन के खिलाफ जा सकता है। ऐसे में इन आदेशों को अदालत में चुनौती दिए जाने की संभावना है।


बर्थ टूरिज्म के पैमाने पर कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, 2020 में सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज ने अनुमान लगाया था कि 2016-17 के दौरान लगभग 20,000 से 25,000 महिलाएं बच्चे को जन्म देने के लिए अमेरिका आई थीं। ट्रंप के नए आदेशों के बाद बर्थराइट नागरिकता और इमिग्रेशन नीति पर बहस फिर से तेज हो गई है।