G7 Summit 2023: पश्चिम एशिया की स्थिति पर विशेष चर्चा, भारत की भूमिका महत्वपूर्ण
G7 शिखर सम्मेलन में पश्चिम एशिया के मुद्दे
नई दिल्ली: फ्रांस में 15 और 16 जून को आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति एक प्रमुख विषय होगा। सम्मेलन के दौरान, 16 जून को मिडिल ईस्ट के हालात पर एक विशेष बैठक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्रीय और वैश्विक नेताओं के बीच सुरक्षा, स्थिरता और कूटनीतिक समाधान पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक में फ्रांस ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मिस्र, सऊदी अरब और कतर जैसे महत्वपूर्ण देशों को आमंत्रित किया है। ईरान से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
लेक जिनेवा में सम्मेलन का आयोजन
यह सम्मेलन फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में लेक जिनेवा के किनारे आयोजित किया जाएगा। इसमें फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, कनाडा, इटली और जापान के शीर्ष नेता शामिल होंगे, साथ ही यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते इस बार की बैठक को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सम्मेलन का एजेंडा और भारत की भूमिका
फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, सम्मेलन का एजेंडा इस प्रकार तैयार किया गया है कि सदस्य देशों के बीच एकजुटता का संदेश जाए और किसी भी मुद्दे पर अनावश्यक टकराव से बचा जा सके। खासकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मतभेदों को सार्वजनिक रूप से उभरने से रोकने का प्रयास किया गया है, ताकि साझा वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग का माहौल बना रहे।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम एशिया पर होने वाली विशेष बैठक में भारत और अमेरिका के नेताओं के साथ कतर, सऊदी अरब और UAE के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इस दौरान समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्रों में निर्बाध आवाजाही जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। फ्रांस का मानना है कि क्षेत्रीय संघर्षों का प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया को इसकी आर्थिक और रणनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
फ्रांसीसी कूटनीतिक सूत्रों ने भारत को इस सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण साझेदार बताया है। उनके अनुसार, भारत को G7 के विभिन्न विमर्शों और बैठकों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। फ्रांस का मानना है कि दोनों देशों के संबंध केवल व्यापारिक हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आपसी भरोसे और रणनीतिक सहयोग पर आधारित हैं।
भारत-फ्रांस संबंधों की मजबूती
सूत्रों ने यह भी कहा कि भारत और फ्रांस के बीच संबंध समानता और साझेदारी के सिद्धांत पर आधारित हैं। भारत की G20 अध्यक्षता की सफलता और BRICS में उसकी भूमिका को भी फ्रांस सकारात्मक नजरिए से देखता है। दोनों देशों के बीच सहयोग के दायरे में 'मेक इन इंडिया' जैसी पहलें भी महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं, जो भविष्य में आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी को और मजबूत बना सकती हैं।
