Imran Khan की रिहाई के लिए PTI का लॉन्ग मार्च: क्या होगी सरकार की प्रतिक्रिया?
पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई की मांग पर PTI का नया कदम
नई दिल्ली: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर सरकार और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रही। दो दौर की वार्ता के बावजूद दोनों पक्ष किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके। इसके परिणामस्वरूप, PTI ने लॉन्ग मार्च निकालने का निर्णय लिया है, जिससे वे सरकार पर दबाव बनाने की योजना बना रहे हैं। पार्टी की प्रमुख मांगों में इमरान खान से उनके परिवार और पार्टी के नेताओं की मुलाकात की अनुमति शामिल है। इसके साथ ही, PTI चाहती है कि इमरान खान को उनके पसंदीदा डॉक्टरों से इलाज कराने की सुविधा मिले और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जाए।
PTI ने इमरान खान की बहनों और कुछ समर्थकों की रिहाई की भी मांग की है। इसके अलावा, उनकी पत्नी बुशरा बीबी की मेडिकल जांच को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सरकार की ओर से PTI के सामने सबसे बड़ी शर्त यह थी कि पार्टी अपने प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च को रद्द करे। हालांकि, PTI ने इन मांगों को मानने से इनकार कर दिया।
बातचीत के दो दौर में नहीं निकला कोई समाधान
सरकार और PTI के बीच बातचीत का पहला दौर शुक्रवार को हुआ, जबकि दूसरा दौर शनिवार को आयोजित किया गया। इन बैठकों में कई मुद्दों पर चर्चा की गई, लेकिन इमरान खान से मुलाकात और उनके इलाज को लेकर गतिरोध बना रहा।
PTI ने पहले 27 सितंबर को मार्च निकालने की योजना बनाई थी, लेकिन इसे टालकर 4 अक्टूबर कर दिया गया। अब बातचीत विफल होने के बाद पार्टी ने अपने समर्थकों को मार्च के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है।
इस्लामाबाद की ओर बढ़ेंगे PTI समर्थक
PTI समर्थकों का मार्च खैबर पख्तूनख्वा से शुरू होकर इस्लामाबाद की ओर बढ़ेगा। पार्टी का कहना है कि यह प्रदर्शन इमरान खान की रिहाई और उनकी स्वास्थ्य संबंधी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। वहीं, सरकार ने संभावित प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है। इस्लामाबाद और आसपास के क्षेत्रों में कंटेनर लगाए जाने और सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी की गई है।
इमरान खान लंबे समय से जेल में हैं और उनकी पार्टी लगातार उनकी रिहाई की मांग कर रही है। ऐसे में सरकार और PTI के बीच बातचीत का विफल होना पाकिस्तान की राजनीति में तनाव बढ़ने का संकेत है। अब सबकी नजर 4 अक्टूबर के लॉन्ग मार्च और सरकार की प्रतिक्रिया पर है।
