North Korea का नया मिसाइल परीक्षण: क्या है इसके पीछे की वजह?
कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: 20 अगस्त 2026 को, नॉर्थ कोरिया ने एक बार फिर से कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव को बढ़ा दिया। प्योंगयांग ने अपने पूर्वी तट से जापान सागर की दिशा में 10 से अधिक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस लॉन्च की पुष्टि साउथ कोरिया और जापान दोनों ने की है। साउथ कोरिया की सेना के अनुसार, ये मिसाइलें प्योंगयांग क्षेत्र से स्थानीय समयानुसार शाम 5 बजे के करीब दागी गईं और लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय की।
जापान की प्रतिक्रिया
जापान के रक्षा मंत्रालय और कोस्ट गार्ड ने भी संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइलों की पहचान की और बताया कि ये समुद्र में गिर गई हैं। जापान ने यह भी कहा कि मिसाइलें उसकी एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन के बाहर गिरीं।
सैन्य अभ्यास का संदर्भ
सैन्य अभ्यास से जुड़ा है कनेक्शन
यह लॉन्च उस समय हुआ जब अमेरिका और साउथ कोरिया का बड़ा संयुक्त सैन्य अभ्यास, उलची फ्रीडम शील्ड, चल रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर इस बार अभ्यास को छोटा किया गया है और यह शुक्रवार को समाप्त होगा, ताकि कूटनीति के लिए रास्ता खुला रहे।
हालांकि, नॉर्थ कोरिया हमेशा इन अभ्यासों को आक्रमण की तैयारी के रूप में देखता है। इतिहास बताता है कि जब भी अमेरिका और साउथ कोरिया मिलकर अभ्यास करते हैं, प्योंगयांग अपने हथियार परीक्षणों को तेज कर देता है। इस बार भी वही पैटर्न देखने को मिला।
किम जोंग उन की बहन, किम यो जोंग ने एक दिन पहले कहा था कि अमेरिका की शत्रुतापूर्ण नीति में कोई बदलाव नहीं आया है और ये अभ्यास अभी भी उत्तेजक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लॉन्च उसी चेतावनी को कार्यान्वित करने का प्रयास था।
तीनों देशों में इमरजेंसी बैठक
तीनों देशों में इमरजेंसी बैठक, हाई अलर्ट
लॉन्च के बाद, साउथ कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने एक इमरजेंसी सुरक्षा बैठक बुलाई। बयान में कहा गया, "बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का गंभीर उल्लंघन है।" प्योंगयांग से ऐसी हरकतें तुरंत रोकने की अपील की गई और सेना को पूरी तैयारी में रहने का आदेश दिया गया।
जापान ने भी इस पर कड़ा विरोध जताया है। साउथ कोरिया ने अपनी निगरानी बढ़ा दी है और अमेरिका तथा जापान के साथ लगातार जानकारी साझा कर रहा है। अमेरिका के पैसिफिक कमांड ने कहा कि फिलहाल अमेरिका या उसके सहयोगियों को कोई तत्काल खतरा नहीं है, लेकिन निगरानी जारी है।
मिसाइल परीक्षण का खतरा
क्यों खतरनाक है ये परीक्षण?
हालांकि शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें लंबी दूरी की नहीं होतीं, लेकिन ये साउथ कोरिया और जापान जैसे क्षेत्रीय लक्ष्यों के लिए सीधा खतरा बनती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नॉर्थ कोरिया अब केवल एक प्रकार की मिसाइल पर नहीं, बल्कि विभिन्न रेंज की मिसाइलों के जखीरे पर काम कर रहा है।
ट्रंप प्रशासन कूटनीति को फिर से शुरू करना चाहता है, लेकिन प्योंगयांग लगातार अपनी मिसाइल क्षमता को बढ़ाकर अपनी ताकत प्रदर्शित कर रहा है। ऐसे परीक्षण न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं, बल्कि परमाणु निरस्त्रीकरण की कोशिशों को भी कमजोर करते हैं।
