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ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी सरकार का बड़ा इनाम प्रस्ताव

अमेरिकी सरकार ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित जानकारी देने पर 20 मिलियन डॉलर तक का इनाम देने की घोषणा की है। यह राशि भारतीय मुद्रा में 180 करोड़ रुपये से अधिक है। जानकारी देने वाले को अन्य देशों में बसाने की सुविधा भी दी जा सकती है। अमेरिका ने ईरान के यूरेनियम संवर्धन पर चिंता जताई है, जो नागरिक उपयोग के लिए आवश्यक स्तर से काफी अधिक है। यह प्रस्ताव राष्ट्रपति ट्रंप के दावों के बाद आया है कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की परमाणु सुविधाओं को नष्ट कर दिया है। जानें इस प्रस्ताव के पीछे की पूरी कहानी।
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अमेरिकी सरकार का इनाम प्रस्ताव

अमेरिकी प्रशासन ने घोषणा की है कि जो भी व्यक्ति ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित जानकारी प्रदान करेगा, उसे 20 मिलियन डॉलर तक का पुरस्कार दिया जाएगा। भारतीय मुद्रा में यह राशि 180 करोड़ रुपये से अधिक है। जानकारी देने वाले को आवश्यकता पड़ने पर अन्य देशों में बसाने की सुविधा भी दी जा सकती है।


विदेश विभाग की पहल

यह घोषणा अमेरिकी विदेश विभाग के रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस विभाग द्वारा की गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस बारे में जानकारी साझा की है।


जानकारी का दायरा

इनाम उन लोगों को मिलेगा जो ईरान की परमाणु सुविधाओं, उपकरणों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के बारे में जानकारी देंगे। अमेरिका ने यह प्रोत्साहन ईरानी वैज्ञानिकों को दिया है, जो परमाणु कार्यक्रमों के बारे में जानते हैं। परमाणु सामग्री की आवाजाही से संबंधित जानकारी भी इस दायरे में शामिल है।


यूरेनियम संवर्धन पर चिंता

रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस के नोटिस में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की 2025 की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान यूरेनियम को 60 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित कर रहा है, जो नागरिक परमाणु उपयोगों के लिए आवश्यक स्तर से काफी अधिक है। आमतौर पर हथियार बनाने के लिए यूरेनियम को लगभग 90 प्रतिशत तक संवर्धित किया जाता है।


ईरान की स्थिति

नोटिस में कहा गया है कि ईरान एकमात्र ऐसा देश है जो परमाणु हथियार न रखने के बावजूद इस स्तर पर यूरेनियम का उत्पादन कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर के यूरेनियम को और संवर्धित करने पर कई परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं।


अमेरिका की चिंताएं

IAEA के प्रति ईरान की सुरक्षा उपायों से संबंधित जिम्मेदारियों पर भी चिंता जताई गई है। कार्यक्रम का कहना है कि ईरान के सहयोग न करने के कारण एजेंसी को सेंट्रीफ्यूज जैसे महत्वपूर्ण परमाणु उपकरणों के उत्पादन और भंडार पर जानकारी प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। अमेरिका पहले भी ईरान से जुड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी देने पर इनाम की घोषणा कर चुका है।


पिछले इनाम प्रस्ताव

2019 में, विदेश विभाग ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वित्तीय नेटवर्क की जानकारी पर 15 मिलियन डॉलर तक का इनाम रखा था। 2024 में, IRGC सदस्य शहराम पूरसफी की गिरफ्तारी या सजा में मदद करने वाली जानकारी पर 20 मिलियन डॉलर तक का इनाम रखा गया था। उन पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन की हत्या की साजिश का आरोप था।


नए इनाम की घोषणा का कारण

हालिया प्रस्ताव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों के बाद आया है, जो उन्होंने अमेरिकी हमलों के प्रभाव के बारे में किए थे। 21 जून 2025 को अमेरिकी सेना ने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के तहत फोर्दो, नतांज और इस्फहान की सुविधाओं पर हमला किया था। ट्रंप ने कहा था कि ये ठिकाने पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं।


हमलों का प्रभाव

हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के प्रारंभिक आकलन में कहा गया कि हमलों से सुविधाओं को नुकसान पहुंचा और ईरान का कार्यक्रम कुछ महीनों के लिए पीछे चला गया, लेकिन यह समाप्त नहीं हुआ। IAEA और परमाणु विशेषज्ञों ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। हमलों के बाद इस भंडार का पूरा हिसाब नहीं मिल सका था।