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चीन-पाकिस्तान संबंधों में गिरावट: अमेरिका की ओर झुकाव

चीन और पाकिस्तान के बीच संबंधों में हालिया गिरावट देखी जा रही है, जिसमें पाकिस्तान का झुकाव अमेरिका की ओर बढ़ रहा है। मौलाना फजलुर रहमान के बयान से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की विदेश नीति चीन को नाराज कर रही है। इसके अलावा, पाकिस्तान में बढ़ते आतंकवाद और सुरक्षा की कमी भी चीन की चिंताओं का कारण बन रही है। जानें कैसे ये घटनाक्रम पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र को प्रभावित कर रहे हैं।
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चीन और पाकिस्तान के रिश्तों में बदलाव

चीन और पाकिस्तान के बीच संबंधों में हालिया गिरावट देखी जा रही है। वर्तमान में, पाकिस्तान की सरकार और सेना प्रमुख असीम मुनीर का झुकाव अमेरिका की ओर अधिक है। पहले जहां पाकिस्तान की सरकार चीन की प्रशंसा में लगी रहती थी, अब वह अमेरिका के साथ संबंधों को प्राथमिकता दे रही है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) के नेता मौलाना फजलुर रहमान ने इस बदलाव को रेखांकित करते हुए कहा कि पाकिस्तान की विदेश नीति के कारण चीन इस्लामाबाद से नाराज है.


चीन की चिंताएं

चीन की नाराजगी का मुख्य कारण पाकिस्तान का अमेरिका की ओर झुकाव नहीं है, बल्कि वहां बढ़ते आतंकवाद से भी है। चीन ने बार-बार पाकिस्तान से अपने नागरिकों और कंपनियों की सुरक्षा की मांग की है, लेकिन पाकिस्तान इस मामले में असफल रहा है। बलूचिस्तान से खैबर पख्तूनख्वा तक चीनी हितों को लगातार खतरा हो रहा है, जिससे चीन के निवेश पर संकट मंडरा रहा है.


बलूचिस्तान में चीन को झटका

बलूचिस्तान में चीन ने कई परियोजनाओं को बंद कर दिया है। पाकिस्तान की सरकार अब अमेरिकी कंपनियों को प्राथमिकता दे रही है, जो चीन की नाराजगी का एक और कारण है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ती आतंकी घटनाएं भी चीन को चिंतित कर रही हैं, जहां चीनी नागरिकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जबकि पाकिस्तान ने सीपीईसी की सुरक्षा के लिए 12000 से अधिक जवान तैनात किए हैं.


पाकिस्तान की बिजली कंपनियों से असंतोष

पाकिस्तान वर्तमान में आर्थिक संकट का सामना कर रहा है और अपनी बिजली कंपनियों का निजीकरण कर रहा है ताकि विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सके। चीन की सरकारी कंपनी पावरचाइना की सहायक कंपनी जियांग शी इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन ने पहले फैसलाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी (FESCO) के अधिग्रहण में रुचि दिखाई थी, लेकिन कंपनी ने बोली दस्तावेज मंदारिन में जमा किए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उसकी रुचि कम थी.


ऊर्जा क्षेत्र में चीन का निवेश

पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र में चीन का सबसे बड़ा निवेश है, लेकिन फैसलाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी के अधिग्रहण से पीछे हटने का मतलब है कि पाकिस्तान में चीन की रुचि घट रही है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) के तहत लगभग 74 प्रतिशत निवेश ऊर्जा क्षेत्र में किया गया है, जिसमें कुल मिलाकर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में चीन का लगभग 68 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश है.


चीन का निवेश विविधीकरण

पाकिस्तान की सरकार ने 2024 में मुजफ्फरगढ़ में 600 मेगावाट का सौर ऊर्जा प्लांट लगाने का निर्णय लिया है, लेकिन इस परियोजना पर चीन ने बोली नहीं लगाई। पहले, पाकिस्तान में स्वच्छ ऊर्जा में सबसे अधिक निवेश चाइना थ्री गॉर्जेस ग्रुप का था, लेकिन इस समूह ने 2016 के बाद पाकिस्तान में कोई निवेश नहीं किया और अब वह मिस्र और जॉर्डन पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.


बकाया और सीपेक की निराशा

चीन ने पहले पाकिस्तान में सीपेक के माध्यम से अधिक निवेश पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन अपेक्षित परिणाम न मिलने पर उसने अपने निवेश में विविधता लाना शुरू किया। वह अफ्रीका और खाड़ी देशों में ऊर्जा निवेश बढ़ा रहा है। पाकिस्तान में सीपेक से जुड़े बिजली प्लांट भारी बकाया से जूझ रहे हैं, जिससे चीनी कंपनियों को नकदी संकट का सामना करना पड़ रहा है, जो चीन की घटती रुचि का एक और कारण है.