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नीला विखे पाटिल: स्वीडन की संसद में भारतीय जड़ों की प्रतिनिधि

नीला विखे पाटिल ने स्वीडन की संसद में अपनी जगह बनाई है, जहां उन्होंने भारतीय जड़ों का प्रतिनिधित्व किया है। उनका राजनीतिक सफर, परिवारिक पृष्ठभूमि और शिक्षा के बारे में जानें। स्वीडन में वामपंथी विपक्ष के बहुमत के साथ, उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। जानें उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में इस लेख में।
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स्वीडन की संसद में नीला विखे पाटिल का आगमन

नीला विखे पाटिल ने स्वीडन की संसद, रिक्सडाग, में अपनी जगह बना ली है। वह उस समय संसद में पहुंची हैं जब स्वीडन के वामपंथी विपक्ष को चुनाव में मामूली बहुमत प्राप्त हुआ है। नीला का जन्म स्वीडन में हुआ और वह अब 41 वर्ष की हैं। कुछ समय के लिए वह भारत के अहमदनगर में रहीं, फिर स्वीडन लौटकर वहां की राजनीति में सक्रिय हो गईं। उनकी जड़ें महाराष्ट्र से जुड़ी हुई हैं।


परिवारिक पृष्ठभूमि

नीला विखे पाटिल, महाराष्ट्र के शिक्षाविद अशोक विखे पाटिल की बेटी और पूर्व केंद्रीय मंत्री बालासाहेब विखे पाटिल की पोती हैं। वह महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल की भतीजी भी हैं। चुनाव जीतने के बाद, उन्होंने एक समाचार एजेंसी के साथ बातचीत में कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके दादा को उनकी उपलब्धियों पर गर्व होगा। उन्होंने यह भी साझा किया कि जब वह 15 साल की थीं, तब उनके दादा ने उन्हें राज्य का बजट पढ़वाया था।


स्वीडन में राजनीतिक सफर

नीला विखे पाटिल ने स्वीडन की राजनीति में कई वर्षों से सक्रियता दिखाई है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्टीफन लोफवेन के कार्यकाल में प्रधानमंत्री कार्यालय में सलाहकार के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने वित्त, कर और आवास से संबंधित मुद्दों पर काम किया। इसके बाद, वह स्टॉकहोम सिटी काउंसिल के लिए चुनी गईं और ग्रीन पार्टी की चुनाव समिति में भी अपनी सेवाएं दीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

नीला विखे पाटिल ने स्वीडिश यंग ग्रीन्स, ग्रीन पार्टी गोथेनबर्ग और ग्रीन स्टूडेंट्स ऑफ स्वीडन में विभिन्न पदों पर कार्य किया है। वह पार्टी की स्टॉकहोम यूनिट की कार्यकारिणी समिति की सदस्य भी रह चुकी हैं। उन्होंने गोथेनबर्ग स्कूल ऑफ बिजनेस से अर्थशास्त्र और कानून में स्नातक और MBA की डिग्री प्राप्त की है।


भारत से संबंध

नीला ने कहा है कि स्वीडन में रहने के बावजूद, वह भारत से गहराई से जुड़ी हुई हैं। उनके कई करीबी भारतीय दोस्त हैं और उनका परिवार लंबे समय से महाराष्ट्र में राजनीति, शिक्षा और सहकारी आंदोलन से जुड़ा रहा है। उनके परदादा विठ्ठलराव विखे पाटिल ने एशिया की पहली सहकारी चीनी मिल की स्थापना की थी। नीला ने अपने दादा के साथ अपने करीबी रिश्ते को भी याद किया और कहा कि उन्हें अपने दादा की बहुत याद आती है।


स्वीडन में विपक्ष का बहुमत

स्वीडन में चार वामपंथी विपक्षी पार्टियों ने 176 सीटें जीती हैं, जो सत्तारूढ़ रूढ़िवादी सरकार बनाने वाली पार्टियों से तीन सीटें अधिक हैं। चुनाव परिणामों के बाद, प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने इस्तीफे की घोषणा की। पूर्व प्रधानमंत्री मैग्डेलेना एंडरसन की सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी 99 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। यह मामूली बहुमत नई सरकार बनाने की प्रक्रिया को चुनौती दे सकता है।