पाकिस्तान में मानवाधिकारों का उल्लंघन: पीओजेके में सेना की बर्बरता
पाकिस्तान की सेना का क्रूर चेहरा
पाकिस्तान की सेना ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) में मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हुए प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की है। सोमवार और मंगलवार को हुई इस घटना में 30 लोगों की जान चली गई। 5 जून के बाद से मरने वालों की संख्या 70 से अधिक हो गई है।
घायलों की स्थिति
अधिकतर प्रदर्शनकारी सेना की गोलीबारी का शिकार बने हैं, और बड़ी संख्या में लोग घायल हैं। उन्हें अस्पतालों में उचित चिकित्सा नहीं मिल रही है। पाकिस्तान की सेना कश्मीरियों के घरों में घुसकर महिलाओं का अपमान कर रही है। सोशल मीडिया पर इस बर्बरता के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें कुछ महिलाएं भारत से मदद की गुहार लगा रही हैं।
इंटरनेट बंद और मीडिया पर रोक
पिछले एक महीने से पीओजेके में इंटरनेट सेवा बंद है, और सुरक्षाबलों ने पूरे क्षेत्र को घेर रखा है। किसी को बाहर जाने की अनुमति नहीं है, और मीडिया की एंट्री पर प्रतिबंध है। 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (जेएएसी) नामक संगठन पिछले साल से स्थानीय लोगों के आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है।
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी का परिचय
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी का गठन 2023 में हुआ था, जिसमें छात्र, वकील, व्यापारी और विभिन्न यूनियन शामिल हैं। यह संगठन स्थानीय लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष करता है और राजनीतिक तथा आर्थिक मुद्दों को उठाता है।
संगठन की प्रमुख मांगें
जेएएसी ने भ्रष्टाचार, शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार की मांग की है। वर्तमान में, उनकी मांग है कि पीओजेके में आरक्षित 12 सीटों को समाप्त किया जाए, जो 1947 के बाद भारत से आए कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। संगठन का तर्क है कि ये कश्मीरी पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं और उनका पीओजेके से कोई संबंध नहीं है।
पाकिस्तान सरकार का रुख
पाकिस्तान सरकार इन सीटों को समाप्त करने के लिए सहमत नहीं है, क्योंकि यह स्थानीय सरकार में उनकी पकड़ को मजबूत करता है। जेएएसी का कहना है कि इससे स्थानीय लोगों की आवाज कमजोर हो रही है।
बातचीत का टूटना
पाकिस्तान सरकार ने पहले जेएएसी से बातचीत की थी, लेकिन यह सिलसिला मई में टूट गया। जून में रावलाकोट में बड़े प्रदर्शन के दौरान सेना ने हिंसा का सहारा लिया, जिसमें कई निहत्थे लोगों की जान गई।
दमन की नीति
5 जून को पाकिस्तान सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बनी। इसके बाद, सरकार ने इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिए। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी को आतंकी संगठन घोषित कर दिया गया।
आंदोलन का दमन
पाकिस्तान की सेना ने 6 और 7 जून को जेएएसी के खिलाफ दमनकारी कार्रवाई शुरू की। संगठन से जुड़े 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और कई लोग गायब हो गए।
भविष्य की योजनाएं
जेएएसी ने मुजफ्फराबाद तक लॉन्ग मार्च का ऐलान किया। जैसे ही प्रदर्शनकारी आगे बढ़े, पाकिस्तान की पुलिस और सेना ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग की। इसके बावजूद, जेएएसी का संघर्ष जारी है।
