बलूचिस्तान में छात्रों के गायब होने की घटनाओं पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की चिंता
पाकिस्तान में छात्रों के गायब होने की बढ़ती घटनाएं
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में छात्रों और युवाओं के जबरन गायब होने के मामलों ने एक बार फिर से विवाद को जन्म दिया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलोच ने हाल ही में इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है, यह बताते हुए कि ऐसे मामलों में तेजी आई है। उनका आरोप है कि छात्रों और शांतिपूर्ण राजनीतिक संगठनों से जुड़े युवाओं को उनके घरों, हॉस्टलों और शैक्षणिक संस्थानों से उठाया जा रहा है। इस संदर्भ में, उन्होंने पाकिस्तान सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान में, सम्मी दीन बलोच ने कहा कि बलूचिस्तान में लोगों के गायब होने की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन हाल के दिनों में छात्रों के लापता होने की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है। उनके अनुसार, इस प्रकार की कार्रवाई से क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है।
https://twitter.com/SammiBaluch/status/2078156487466348561
सम्मी दीन बलोच के गंभीर आरोप
सम्मी दीन बलोच ने यह भी कहा कि सरकार इन कार्रवाइयों को आतंकवाद विरोधी अभियानों का हिस्सा बताकर सही ठहराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने लिखा, 'अगर यही तरीका शांति लाने का होता, तो बलूचिस्तान आज खून-खराबे, असुरक्षा और नफरत के माहौल में नहीं होता। असलियत यह है कि यह नीति शांति नहीं, बल्कि और अधिक नफरत और हिंसा को जन्म दे रही है। जब युवाओं को बिना किसी अपराध और कानूनी प्रक्रिया के वर्षों तक सरकारी हिरासत में रखा जाता है, तो उनके साथ अमानवीय व्यवहार, यातनाएं और अपमान किया जाता है, जिससे उनके मन में राज्य के खिलाफ गुस्सा और बदले की भावना पैदा होती है।'
मानवाधिकार कार्यकर्ता ने यह भी बताया कि कई युवाओं को बिना किसी आरोप या न्यायिक प्रक्रिया के लंबे समय तक हिरासत में रखा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार, यातना और अपमान किया जाता है। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएं युवाओं में गुस्सा और व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करती हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
पाकिस्तान सरकार ने आरोपों को खारिज किया
सम्मी दीन बलोच ने सरकार से दमनकारी नीतियों की समीक्षा करने और यह विचार करने की अपील की कि वर्षों से जबरन गायब होने, फर्जी मुठभेड़ों और सामूहिक सजा जैसी कार्रवाइयों के बावजूद बलूचिस्तान में स्थायी शांति क्यों नहीं स्थापित हो सकी। उनका कहना है कि अशांति की जड़ दमनकारी नीतियां और लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है।
हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने पहले भी इस तरह के आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियां कानून के दायरे में रहकर काम करती हैं और उनका उद्देश्य आतंकवाद पर काबू पाना तथा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। इसलिए, जबरन गायब होने के आरोपों को सरकार निराधार बताती रही है।
