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रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग, स्थिति गंभीर

रावलाकोट में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर गोलीबारी की, जिससे कई लोग घायल हुए। प्रदर्शनकारी अपने गिरफ्तार साथियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं। स्थिति गंभीर है, और स्थानीय लोग अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार लगा रहे हैं। जानें इस घटना के पीछे की पूरी कहानी और इसके प्रभाव।
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पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हिंसा

सोमवार को पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के रावलाकोट में सुरक्षाबलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर गोलीबारी की, जिससे कई लोग घायल हो गए। स्थानीय निवासियों द्वारा साझा किए गए वीडियो में दिखाया गया है कि सड़कें खून से सनी हुई हैं और कई शव बिखरे पड़े हैं।


52 दिनों से चल रहा प्रदर्शन

ज्वाइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) के नेतृत्व में रावलाकोट में पिछले 52 दिनों से प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी अपने गिरफ्तार साथियों की रिहाई, उनके खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने और अन्य मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं।


सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

अकील, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर:-
स्थिति बेहद गंभीर है। रावलाकोट में लाशों और घायलों की भरमार है। मैं बाल-बाल बचा हूं। इतने सारे भाइयों को शहीद होते देख अब मुझे अपनी जान की कोई परवाह नहीं। मैं सभी से मदद की गुहार लगाता हूं।


बातचीत में असफलता

सुबह JAAC और प्रशासन के बीच बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। प्रदर्शनकारियों ने दोपहर 1 बजे तक का समय दिया था, जिसके बाद हजारों लोग रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करने लगे।


खून से सनी सड़कें

सोशल मीडिया पर अकील का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि रावलाकोट की सड़कें खून से लाल हो गई हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील की है।


घायलों की स्थिति

अकील ने बताया कि एंबुलेंस की कमी के कारण लोग घायलों को खुद उठाकर ले जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी बलों ने उन पर गोली चलाई, जिसमें 15 से 20 लोग घायल हुए हैं।


चुनावों पर प्रभाव

इस आंदोलन के कारण पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर में चुनावी गतिविधियों पर भी असर पड़ा है। मीरपुर डिवीजन के कुछ क्षेत्रों में मतदान हो रहा है, लेकिन कई जगहों पर हिंसा और धांधली के आरोप लगे हैं।


चुनावों की नई तारीख

रावलाकोट और सुधनोती जिले के चुनाव अब 10 अगस्त तक टाल दिए गए हैं। प्रदर्शनकारियों का मार्च जारी है और स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। स्थानीय लोग अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील कर रहे हैं।