Newzfatafatlogo

PoK में फिर भड़की हिंसा: पाक सेना और नागरिकों के बीच टकराव

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में रावलकोट में हालात बिगड़ गए हैं, जहां पाक सेना और स्थानीय नागरिकों के बीच हिंसक टकराव की घटनाएं हो रही हैं। आरोप है कि सेना ने नागरिकों पर ड्रोन से हमला किया और अंधाधुंध गोलीबारी की, जिससे कई लोग घायल हुए और तीन की मौत हो गई। प्रदर्शनकारी अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं और उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे विरोध जारी रखेंगे। यह स्थिति जून 2026 से चल रहे प्रदर्शनों का हिस्सा है, जो अब राजनीतिक अधिकारों की मांग तक पहुंच गई है।
 | 

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हालात बिगड़े


नई दिल्ली: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में स्थिति एक बार फिर गंभीर हो गई है। रावलकोट में पाकिस्तानी सेना और स्थानीय निवासियों के बीच हिंसक झड़पों की घटनाएं सामने आई हैं। आरोप है कि सेना ने नागरिकों के घरों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन का उपयोग किया और अंधाधुंध फायरिंग की। इस संघर्ष में तीन लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 18 अन्य घायल हुए हैं।


सुबह 5 बजे से शुरू हुई गोलीबारी

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के अनुसार, गुरुवार सुबह लगभग 5 बजे से रावलकोट के उमर फारूक चौक और उसके आस-पास गोलीबारी का सिलसिला शुरू हुआ। उस समय प्रदर्शनकारी और आम लोग सड़कों पर थे। इसी दौरान सेना ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी। कई स्थानों पर ड्रोन से भी हमले किए गए, जिससे कई घरों में आग लग गई।


प्रदर्शनकारियों का आरोप

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सेना ने जानबूझकर नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाया। उनका दावा है कि वे अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे थे, लेकिन उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे विरोध जारी रखेंगे और पीछे नहीं हटेंगे।


जून से चल रहा है विरोध

रावलकोट में हुई यह हिंसा अचानक नहीं हुई है। जून 2026 से PoK के विभिन्न क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन महीनों में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 153 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


महंगाई से शुरू हुआ आंदोलन, अब अधिकारों की मांग

प्रारंभ में लोग महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरे थे। लेकिन अब यह विरोध केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शनकारी अब राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारों की भी मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि विधानसभा में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व मिले, स्थानीय संसाधनों पर उनका नियंत्रण हो और प्रशासनिक स्वायत्तता दी जाए, ताकि वे अपने मामलों का प्रबंधन स्वयं कर सकें।


प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनके क्षेत्र के जल, खनिज और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग हो रहा है, लेकिन इसका लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच रहा। इसी कारण उन्हें सरकार और प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतरना पड़ा। फिलहाल रावलकोट में तनाव बना हुआ है, और लोगों में डर के साथ-साथ गुस्सा भी है। आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।