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UAE का स्पष्ट संदेश: क्षेत्र में सैन्य संघर्ष का समर्थन नहीं करेंगे

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पश्चिम एशिया में किसी नए सैन्य संघर्ष का समर्थन न करने का स्पष्ट संकेत दिया है। अमीरात के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गरगाश ने कहा कि मौजूदा विवाद को हथियारों से सुलझाने की कोशिशें क्षेत्र के लिए हानिकारक हो सकती हैं। ईरान के विदेश मंत्री ने कतर में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए बातचीत की बात की है। UAE और बहरीन की सुरक्षा चिंताएं बढ़ रही हैं, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल होने की स्थिति में। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो रहा है।
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संयुक्त अरब अमीरात का सैन्य संघर्ष के खिलाफ रुख


पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद अस्थिरता के बीच, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया है कि वह क्षेत्र में किसी भी नए सैन्य संघर्ष का समर्थन नहीं करेगा। अमीरात के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गरगाश ने बहरीन की राजधानी मनामा में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में कहा कि मौजूदा विवाद को हथियारों के माध्यम से सुलझाने की कोशिश पूरे क्षेत्र के लिए हानिकारक हो सकती है। उनके अनुसार, ईरान से जुड़ा संघर्ष केवल कुछ देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किए गए हैं। UAE चाहता है कि अमेरिका और ईरान बातचीत के माध्यम से तनाव को कम करने का प्रयास करें।


कतर की मध्यस्थता से होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा

ईरान के विदेश मंत्री ने बताया कि उनका देश कतर में एक प्रस्ताव पर चर्चा कर रहा है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का रास्ता मिल सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि, अराघची ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ उनकी सीधी बातचीत नहीं हो रही है। किसी भी संभावित समझौते की दिशा में आगे बढ़ना अमेरिकी प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। ईरान का कहना है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए कूटनीतिक और रक्षात्मक दोनों विकल्पों के लिए तैयार है।


UAE पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की संख्या

खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के दौरान सुरक्षा स्थिति कितनी गंभीर रही, इसका अंदाजा UAE पर हुए हमलों से लगाया जा सकता है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) के अनुसार, अप्रैल में युद्धविराम लागू होने से पहले ईरान की ओर से UAE पर तीन हजार से अधिक ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। इन हमलों के संभावित निशाने में हवाई अड्डे, सैन्य प्रतिष्ठान और तेल से जुड़ी सुविधाएं शामिल थीं। इनमें से अधिकांश हमलों को नाकाम कर दिया गया। इसके बाद खाड़ी देशों ने अपनी रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारी निवेश किया। अनवर गरगाश के अनुसार, इस संघर्ष के बाद अमेरिका और अमीरात के बीच रणनीतिक संबंध पहले से अधिक मजबूत हुए हैं।


बहरीन पर भी हमलों का खतरा

युद्ध के दौरान बहरीन को भी बड़े सुरक्षा खतरे का सामना करना पड़ा। IISS के आंकड़ों के अनुसार, ईरान की ओर से वहां लगभग 500 ड्रोन और करीब 200 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्य ठिकाना मौजूद है। हमलों के दौरान नौसैनिक अड्डे के अलावा रिहायशी इमारतों और पानी को शुद्ध करने वाली सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया। बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जायानी ने भी क्षेत्र में तनाव घटाने की कोशिशों का समर्थन किया है।


खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताएं

UAE और बहरीन की चिंताएं केवल पुराने हमलों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश मानते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल होने की स्थिति में क्षेत्र में फिर से सैन्य तनाव बढ़ सकता है। इसी आशंका के चलते खाड़ी देशों ने अपनी सुरक्षा तैयारियों को मजबूत किया है। इस गर्मी में हूती समूह की ओर से सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों पर हमलों में तेजी आने की बात भी सामने आई है।


ऊर्जा मार्ग और क्षेत्रीय स्थिरता का महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी बातचीत का महत्व केवल ईरान और अमेरिका के संबंधों तक सीमित नहीं है। इस मार्ग पर तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। UAE की प्राथमिकता है कि समुद्री आवाजाही सुरक्षित रहे और खाड़ी क्षेत्र किसी नए संघर्ष में न फंसे। अमीरात का संदेश है कि सैन्य ताकत का प्रदर्शन संकट को लंबा कर सकता है, जबकि बातचीत से सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य रास्ता निकलने की संभावना बनी रह सकती है।