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UN महासभा में Netanyahu का विवादास्पद भाषण: ईरान पर हमले का किया जिक्र

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में ईरान पर हमले का जिक्र किया, जिसे उनके कार्यकाल का एक सरल निर्णय बताया। उनके भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से हॉल से बाहर जाने का निर्णय लिया, जिससे हॉल में खाली सीटें नजर आईं। नेतन्याहू ने बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों को 'नैतिक रूप से कायर' कहा और इजरायल की सुरक्षा को लेकर अपने दावों को दोहराया। इस भाषण ने फलस्तीनी मिशन की अपील के बाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय विवाद को जन्म दिया है।
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नेतन्याहू का विवादास्पद भाषण


नई दिल्ली: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान कहा कि ईरान पर हमला करना उनके कार्यकाल का एक सरल निर्णय होगा। उन्होंने उन डिप्लोमैट्स पर भी कड़ी टिप्पणी की, जो उनके भाषण से पहले हॉल से बाहर चले गए। जैसे ही नेतन्याहू ने भाषण देना शुरू किया, हॉल में तालियों, हूटिंग और वॉकआउट का मिश्रित दृश्य देखने को मिला।


कई देशों के प्रतिनिधि तुरंत अपनी जगह से उठकर बाहर चले गए, जिससे हॉल में अधिकांश सीटें खाली हो गईं। महासभा के अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने बार-बार शांति बनाए रखने की अपील की। भाषण की शुरुआत में नेतन्याहू ने चुटकी लेते हुए कहा कि जो लोग अभी हॉल छोड़ना चाहते हैं, वे अब जा सकते हैं। उन्होंने बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों को 'नैतिक रूप से कायर' कहा।


इजरायल की सुरक्षा का दावा

इजरायल ने खुद को बताया दूसरे देशों का रक्षक


अपने भाषण में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा करते हुए अन्य देशों की भी रक्षा कर रहा है, जिनके प्रतिनिधि हॉल से बाहर गए। उन्होंने यह भी कहा कि कई देशों के नेता व्यक्तिगत रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नुकसान पहुंचाने के लिए इजरायल का आभार व्यक्त करते हैं, भले ही वे सार्वजनिक रूप से अलग रुख अपनाते हों।


फलस्तीनी मिशन की सामूहिक वॉकआउट की अपील

फलस्तीनी मिशन की अपील पर सामूहिक वॉकआउट


रिपोर्टों के अनुसार, फलस्तीनी मिशन ने पहले ही 193 सदस्य देशों को संदेश भेजकर अधिक से अधिक प्रतिनिधियों को सभा हॉल में बुलाने और नेतन्याहू के नाम की घोषणा होते ही सामूहिक रूप से बाहर निकलने की अपील की थी। इस संदेश में कहा गया था कि यह कदम इजरायली सरकार को यह स्पष्ट संकेत देगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसकी नीतियों और कथित युद्ध अपराधों का समर्थन नहीं करता।


इजरायल हमेशा से नरसंहार और युद्ध अपराधों के आरोपों को नकारता आया है। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, फलस्तीनी क्षेत्रों में इजरायली बस्तियां अवैध मानी जाती हैं, जबकि इजरायल सरकार का कहना है कि ये बस्तियां पूरी तरह से कानूनी हैं। यह मुद्दा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विवाद का विषय बना हुआ है, और नेतन्याहू के इस भाषण ने एक बार फिर इस बहस को ताजा कर दिया है।