Newzfatafatlogo

अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप ने बातचीत से किया इनकार, सैन्य हमले जारी

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने बातचीत से इनकार करते हुए कहा है कि जब तक ईरान गंभीरता से वार्ता के लिए तैयार नहीं होता, तब तक अमेरिका कोई बैठक नहीं करेगा। इस बीच, अमेरिकी सेना ने लगातार 11 रातों तक ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। ईरान ने भी अपने सर्वोच्च नेता के साथ समन्वय को मजबूत करने का दावा किया है। इस संकट के चलते वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
 | 

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार फिलहाल ईरान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत में रुचि नहीं रखती। ट्रंप ने कहा कि जब तक तेहरान गंभीर और सार्थक वार्ता के लिए तैयार नहीं होता, तब तक वॉशिंगटन किसी भी बैठक का आयोजन नहीं करेगा। इस बीच, दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियाँ भी तेजी से बढ़ रही हैं।


ट्रंप का बयान: बातचीत का कोई अर्थ नहीं

व्हाइट हाउस में लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरानी अधिकारी बैक-चैनल के माध्यम से अमेरिका से संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिका बातचीत के लिए तैयार नहीं है।


ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान बातचीत के लिए बहुत इच्छुक है, लेकिन जब तक वह गंभीरता से नहीं आता, तब तक अमेरिका की उनकी ओर से कोई रुचि नहीं है। उन्होंने यह दावा किया कि ईरान वर्तमान संघर्ष में लगातार कमजोर हो रहा है।


ईरान का जवाब

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि देश के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के साथ उनका समन्वय पहले से अधिक मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि सरकार के सभी महत्वपूर्ण निर्णय सर्वोच्च नेता के निर्देशों के अनुसार लिए जा रहे हैं और देश इसी दिशा में मजबूती से आगे बढ़ेगा।


अमेरिका के हमले जारी

तनाव के बीच, अमेरिकी सेना ने लगातार 11वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों के लिए खतरे को कम करना है।




विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य इस संघर्ष का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से की ऊर्जा आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है।


युद्ध की लागत

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कांग्रेस को बताया कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान पर अमेरिका अब तक लगभग 37.5 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। उन्होंने कहा कि सेना के संचालन और भविष्य की तैयारियों के लिए अतिरिक्त 67 अरब डॉलर की आवश्यकता है। उनके अनुसार, यह राशि राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य क्षमता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।


तनाव कम होने की संभावना नहीं

वर्तमान में, दोनों देशों के बीच न तो सैन्य कार्रवाई में कमी आ रही है और न ही कूटनीतिक बातचीत की कोई ठोस संभावना दिखाई दे रही है। इस प्रकार, पश्चिम एशिया में बढ़ता यह संकट वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।