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अमेरिका-ईरान तनाव में कमी से शेयर बाजारों में आई तेजी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी के संकेतों ने सोमवार को वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी ला दी है। कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा है। यूरोप और एशिया के बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है। जानें इस स्थिति का बाजार पर क्या असर हो सकता है।
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शेयर बाजारों में सकारात्मक बदलाव


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी के संकेतों ने सोमवार को वैश्विक शेयर बाजारों में सकारात्मक प्रभाव डाला। दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम पर बातचीत फिर से शुरू होने की उम्मीद ने निवेशकों की चिंताओं को कम किया, जिससे बाजार में तेजी आई। इस दौरान, कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट आई।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर लगभग 85.49 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड की कीमत भी 83.06 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गई। तेल की कीमतों में कमी ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया और कई देशों के शेयर बाजार हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।


यूरोप के बाजारों में उछाल

यूरोप के बाजारों का क्या हाल


यूरोप के प्रमुख बाजारों में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली। जर्मनी का DAX, फ्रांस का CAC 40 और ब्रिटेन का FTSE 100 सभी सकारात्मक रुख के साथ खुले। अमेरिकी शेयर बाजार खुलने से पहले S&P 500 और डॉव जोंस के फ्यूचर्स में भी मजबूती देखी गई। एशियाई बाजारों का प्रदर्शन भी सकारात्मक रहा, जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया, हांगकांग, चीन और भारत के शेयर बाजारों में खरीदारी का माहौल बना रहा। हालांकि, ताइवान का बाजार मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।


वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत की उम्मीद

वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिल सकती है राहत


इस बीच, चीन की मेमोरी चिप निर्माता कंपनी CXMT ने शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की। लिस्टिंग के पहले दिन ही कंपनी के शेयरों में 466 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई, जिससे उसका बाजार मूल्य तेजी से बढ़ा। हालांकि, बाजार में राहत का माहौल है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की नजर अमेरिका के फेडरल रिजर्व की बैठक पर रहेगी। ब्याज दरों के संबंध में लिया गया निर्णय आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकता है।


इसके अलावा, महंगाई, वैश्विक आर्थिक स्थिति और कंपनियों के तिमाही परिणाम भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है, तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है। हालांकि, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों के निर्णयों पर नजर रखना आवश्यक होगा।