अमेरिका-ईरान संघर्ष का अंत: ऐतिहासिक कूटनीतिक समझौता
28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक समझौता हुआ, जिसने दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त किया। अमेरिका ने अपनी नाकेबंदी हटा ली, जबकि ईरान ने इसे अपनी जीत बताया। इस समझौते के साथ ही, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर सुरक्षा को लेकर कड़े रुख अपनाए हैं। लेबनान के मुद्दे पर इज़राइल की स्थिति और ट्रंप की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। क्या यह समझौता स्थायी शांति की ओर एक कदम है, या स्थिति और जटिल हो गई है? जानें पूरी कहानी।
| Jun 19, 2026, 12:54 IST
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता
28 फरवरी से जारी अमेरिका और ईरान के बीच के गंभीर संघर्ष का समापन एक महत्वपूर्ण और अप्रत्याशित कूटनीतिक समझौते के साथ हुआ है। इस समझौते के तुरंत बाद, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों और तेल टैंकरों पर अपनी नाकेबंदी को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है, जबकि ईरान ने इसे अपनी 'ऐतिहासिक जीत' बताया है। 'होर्मुज जलडमरूमध्य', जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्गों में से एक है, पर ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी यूरोपीय नौसैनिक मिशन की दखलंदाजी को बर्दाश्त नहीं करेगा। इसके अलावा, ईरान ने पश्चिमी देशों की रणनीति को चुनौती देते हुए यह घोषणा की है कि अमेरिका के साथ 60 दिनों की बातचीत की अवधि समाप्त होने के बाद, इस जलमार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों से 'समुद्री टैक्स' वसूलने की नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
लेबनान का मुद्दा
लेबनान का मुद्दा अभी भी बना हुआ
यह चेतावनी तब आई जब इज़राइली समाचार पत्र 'येदिओथ अहरोनोथ' ने बताया कि इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इज़राइल दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखेगा जब तक इसकी आवश्यकता होगी। उनका इशारा उस क्षेत्र की ओर था जो इज़राइली सैनिकों के कब्जे में है। ईरान के संदर्भ में, नेतन्याहू ने कहा कि इज़राइल का लक्ष्य तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। वहीं, ईरान ने जोर देकर कहा कि लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता के लिए इज़राइल का पूरी तरह से पीछे हटना आवश्यक है, जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
क्या मामला सुलझा या और उलझ गया?
मामला सुलझा या और उलझ गया?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को लेबनान, हिज़्बुल्लाह और इज़राइल के बीच युद्धविराम की पूरी उम्मीद है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि हम मध्य पूर्व में सभी पक्षों से अपील करते हैं कि वे हमारी बातचीत को आगे बढ़ने देने के अपने वादे पर कायम रहें। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने इस समझौते को मंजूरी दी और ट्रंप की टीम के साथ सीधी बातचीत का समर्थन किया। खामेनेई ने कहा कि ट्रंप ने इस समझौते को करने के लिए हर संभव प्रयास किए। हालाँकि, स्थिति तब जटिल हो गई जब इज़राइल ने लेबनान पर ड्रोन हमले और तोपखाने से गोलाबारी जारी रखी। दूसरी ओर, हिज़्बुल्लाह ने हाल के दिनों में इज़राइली सेना पर कई हमलों की जिम्मेदारी ली। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इज़राइल की आलोचना करने वालों को जवाब दिया और कहा कि ट्रंप एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हैं जो इज़राइल के प्रति सहानुभूति रखते हैं।
